गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर खुलकर सवाल उठाए हैं. एक सरकारी कार्यशाला के मंच से उन्होंने खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए. विधायक ने दावा किया कि विभाग की कार्यप्रणाली ऐसी हो गई है कि कलेक्टर और एसडीएम जैसे अधिकारी भी कई मामलों में बेबस नजर आते हैं. उनके इस बयान के बाद जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है.
सरकारी कार्यशाला में उठाया भ्रष्टाचार का मुद्दा
गुरुवार को गुना में आयोजित 'तेजस कार्यशाला' में विधायक पन्नालाल शाक्य को संबोधन के लिए आमंत्रित किया था. यह कार्यक्रम युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया था. कार्यक्रम में उद्योगपति, व्यापारी, युवा उद्यमी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे. हालांकि अपने संबोधन के दौरान विधायक ने कार्यशाला के मूल विषय से हटकर सीधे खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए.
खनिज विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
मंच से बोलते हुए विधायक शाक्य ने कहा कि खनिज विभाग अवैध उत्खनन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय आम लोगों को परेशान कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि जरूरत के लिए सामग्री खरीदने वाले किसानों और ग्रामीणों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि असली जिम्मेदार लोगों तक विभाग नहीं पहुंचता. विधायक ने यहां तक कह दिया कि "पूरा चोरपना अधिकारी खुद करवा रहे हैं" और फिर जुर्माने के नाम पर लोगों से वसूली की जाती है.
किसान का उदाहरण देकर सुनाई पूरी कहानी
विधायक ने अपनी विधानसभा के एक किसान का मामला भी मंच से साझा किया. उन्होंने बताया कि किसान कृषि उपज मंडी में अनाज बेचने के बाद अपने घर के निर्माण कार्य के लिए एक फड़ से भसुआ खरीदकर ट्रॉली में ले जा रहा था. किसान ने सामग्री के पैसे भी दिए थे, लेकिन रास्ते में खनिज विभाग ने उसकी ट्रॉली रोककर उस पर जुर्माना लगा दिया. विधायक का कहना था कि किसान किसी नदी या तालाब से अवैध खनन नहीं कर रहा था, फिर भी उसके खिलाफ कार्रवाई की गई.
खनिज अधिकारी से फोन पर हुई बहस
पन्नालाल शाक्य ने बताया कि किसान की शिकायत मिलने पर उन्होंने खुद खनिज अधिकारी को फोन लगाया. विधायक के अनुसार उन्होंने अधिकारी से पूछा कि जब किसान ने वैध तरीके से सामग्री खरीदी है तो उस पर जुर्माना क्यों लगाया जा रहा है. लेकिन अधिकारी ने जवाब दिया कि नियमों के तहत कार्रवाई होगी. विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग आम लोगों को परेशान कर रहा है और मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रहा है.
एसडीएम और कलेक्टर पर भी उठाए सवाल
विधायक ने कहा कि जब खनिज अधिकारी ने उनकी बात नहीं मानी तो उन्होंने संबंधित एसडीएम से संपर्क किया. उनके मुताबिक एसडीएम ने भी बाद में असमर्थता जताते हुए कहा कि अधिकारी जुर्माना नहीं हटाएगा क्योंकि रसीद कट चुकी है. इसके बाद विधायक ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से भी बात की. उन्होंने दावा किया कि कलेक्टर ने मामले की जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही, लेकिन काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला. इसी आधार पर उन्होंने मंच से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए.
कार्यक्रम में दिखी असहजता
विधायक के आरोपों के दौरान सभागार में मौजूद अधिकारी और प्रशासनिक अमला असहज नजर आया. जिस मंच से स्टार्टअप और नवाचार पर चर्चा होनी थी, वहां प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली बहस का विषय बन गई. विधायक के बयान के बाद मौजूद लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं होती रहीं.
कार्यक्रम के दौरान एक और बात चर्चा में रही कि विधायक पन्नालाल शाक्य और कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल एक साथ मंच पर नजर नहीं आए. पहले कलेक्टर कार्यक्रम में पहुंचे और अपना संबोधन देकर रवाना हो गए, जबकि उसके बाद विधायक कार्यक्रम में पहुंचे. इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.
पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान
पन्नालाल शाक्य इससे पहले भी अपनी ही सरकार के कामकाज और कुछ मंत्रियों पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने बिजली कटौती के मुद्दे पर भी प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों पर सवाल उठाए थे. उनके बयानों को लेकर प्रदेश भाजपा संगठन ने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था. इसके बावजूद उनके तेवर नरम नहीं पड़े हैं और अब खनिज विभाग को लेकर दिया गया उनका ताजा बयान फिर से चर्चा का विषय बन गया है.