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Audit Report: जबलपुर में पंचगव्य शोध परियोजना पर सवाल, 3.50 करोड़ रुपये खर्च, जांच रिपोर्ट ने चौंकाया

Audit Report Panchagavya Research Project: जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पंचगव्य प्रोजेक्ट के नाम पर विश्वविद्यालय की टीम द्वारा गोवा का दौरा किया गया, साथ ही कई उपकरणों की खरीदी की गई. जांच में यह भी सामने आया है कि परियोजना की राशि का एक बड़ा हिस्सा ऐसे मदों में खर्च किया गया, जिन्हें गैर-जरूरी माना जा रहा है.

Audit Report: जबलपुर में पंचगव्य शोध परियोजना पर सवाल, 3.50 करोड़ रुपये खर्च, जांच रिपोर्ट ने चौंकाया
Audit Report: जबलपुर में पंचगव्य शोध परियोजना पर सवाल, 3.50 करोड़ रुपये खर्च, जांच रिपोर्ट ने चौंकाया

Nanaji Deshmukh Veterinary Science University Jabalpur: जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (Nanaji Deshmukh Pashu Chikitsa Vigyan Vishwa Vidyalaya) में सरकार द्वारा स्वीकृत पंचगव्य शोध परियोजना के अंतर्गत किए गए खर्च को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. यह पंचगव्य शोध परियोजना कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों सहित अन्य असाध्य रोगों पर अनुसंधान के उद्देश्य से शुरू की गई थी. परियोजना की कुल लागत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें से 3.50 करोड़ रुपये की राशि विश्वविद्यालय को प्राप्त हुई थी.

रिपोर्ट में क्या है?

प्राप्त शिकायतों के बाद संभागायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए. कलेक्टर ने एक अतिरिक्त कलेक्टर के नेतृत्व में जांच दल गठित किया, जिसने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है.

जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पंचगव्य प्रोजेक्ट के नाम पर विश्वविद्यालय की टीम द्वारा गोवा का दौरा किया गया, साथ ही कई उपकरणों की खरीदी की गई. जांच में यह भी सामने आया है कि परियोजना की राशि का एक बड़ा हिस्सा ऐसे मदों में खर्च किया गया, जिन्हें गैर-जरूरी माना जा रहा है.

अपर कलेक्टर रघुवर मरावी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट अब कलेक्टर के माध्यम से संभागायुक्त को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होने की संभावना है.

वहीं दूसरी ओर, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि परियोजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है, सभी खर्च नियमानुसार किए गए हैं और कलेक्टर द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए गए हैं.

अब यह मामला संभागायुक्त के स्तर पर पहुंचने के बाद आगे की जांच और निर्णय पर निर्भर करेगा.

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