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एमपी के इस जिले में पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया! प्रशासन ने तुरंत रोकी सप्लाई, फ्री की जांच

शिवपुरी में पीने के पानी के सैंपल में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से हड़कंप मच गया. इंदौर में गंदे पानी से मौतों के बढ़ते मामलों के बाद प्रशासन सतर्क हुआ और प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई तुरंत रोक दी गई.

एमपी के इस जिले में पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया! प्रशासन ने तुरंत रोकी सप्लाई, फ्री की जांच

Madhya Pradesh Drinking Water Alert: इंदौर में गंदे पानी से मौत के आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच शिवपुरी जिले में पीने के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से हड़कंप मच गया. हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई रोक दी और जांच शुरू कर दी. गनीमत यह रही कि समय रहते समस्या पकड़ में आ गई, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सका.

इंदौर की घटनाओं के बाद सरकार सतर्क

इंदौर में दूषित पानी पीने से हो रही मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में पानी की गुणवत्ता को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. सभी जिलों की लैबोरेट्री को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं. टेक्निशियनों को साफ कहा गया है कि पानी की नियमित जांच की जाए और अगर कोई कमी सामने आए तो तुरंत प्रशासन को जानकारी दी जाए.

शिवपुरी में पानी की हार्डनेस और बैक्टीरिया  

शिवपुरी में पहले से ही पानी की हार्डनेस लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी. अब कई इलाकों में पानी के सैंपल में बैक्टीरिया पाए जाने से चिंता और बढ़ गई है. यह स्थिति सीधे तौर पर लोगों की सेहत के लिए खतरा मानी जा रही है.

जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रभावित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई पर तत्काल रोक लगा दी. अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता, तो शिवपुरी में भी इंदौर जैसी स्थिति बन सकती थी.

रोज आ रहे 10 से 20 सैंपल, जांच जारी

शिवपुरी में रोजाना 10 से 20 पानी के सैंपल जांच के लिए लैब में पहुंच रहे हैं. जांच में सामने आया है कि ज्यादातर ट्यूबवेल के पानी में हार्डनेस अधिक है, जबकि जलावर्धन योजना के तहत सप्लाई होने वाला पानी मटमैला है. इसी वजह से प्रशासन फिलहाल बेहद सतर्कता के साथ कदम उठा रहा है.

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

दूषित पानी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी साफ नजर आ रही है. स्थानीय नागरिक जयदीप खन्ना कहते हैं कि पानी इतना गंदा आता है कि पीने लायक बिल्कुल नहीं है. नगर पालिका में कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. 

पुन्नू बाई का कहना है कि थोड़ी देर रखने पर पानी में मिट्टी नीचे जम जाती है. ऐसे पानी को पीने का पानी कैसे कहा जा सकता है? मनोज सेगर बताते हैं कि पानी बिल्कुल पीने लायक नहीं है, लेकिन मजबूरी में इस्तेमाल करना पड़ता है. गायत्री देवी का कहना है कि नगर पालिका का पानी हम नहीं पीते. या तो बोर का पानी लेते हैं या आरओ का, क्योंकि सप्लाई वाले पानी में बदबू आती है. 

लैब प्रभारी ने बताई जांच की स्थिति

जल परीक्षण लैब प्रभारी राजीव भाटिया ने बताया कि रोजाना आने वाले सभी सैंपल की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि ट्यूबवेल के पानी में हार्डनेस ज्यादा पाई जा रही है, जबकि जलावर्धन योजना के तहत मणि खेड़ा से आने वाला पानी मटमैला होता है. कई जगह पाइपलाइन पूरी न होने के कारण टीडीएस का स्तर भी ज्यादा मिल रहा है, जिसकी जानकारी जिला और नगर प्रशासन को दी जा रही है.

पानी की जांच अब मुफ्त, प्रशासन का बड़ा फैसला

लोगों को राहत देते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. पहले जहां एक सैंपल की जांच के लिए 1500 रुपये देने पड़ते थे, अब यह जांच पूरी तरह निशुल्क कर दी गई है. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से पानी के सैंपल जांच के लिए लैब में पहुंचा रहे हैं.

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