Cabinet Decisions MP : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में जनहित से जुड़े कई अहम और दूरगामी निर्णय लिए गए. किसानों की चिंता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और आधारभूत ढांचे के विकास को केंद्र में रखते हुए मोहन कैबिनेट ने एक साथ कई मोर्चों पर बड़े ऐलान किए. डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती को प्रदेशव्यापी अभियान के रूप में मनाने से लेकर गेहूं खरीदी की तारीख आगे करने, चना‑मसूर‑सरसों की खरीदी, नई सड़क परियोजनाओं की मंजूरी, उज्जैन को वैश्विक कालगणना केंद्र के रूप में स्थापित करने और भोपाल में फाइनेंशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना तक, सरकार ने विकास का एक व्यापक रोडमैप सामने रखा है. कैबिनेट के फैसलों की जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने दी.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।@DrMohanYadav51 #CMMadhyaPradesh #CabinetMP pic.twitter.com/KVsglyKdsj
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8 से 14 अप्रैल तक प्रदेशव्यापी अंबेडकर जयंती अभियान
मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने जानकारी दी कि डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती को इस बार केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानते हुए 8 से 14 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. प्रत्येक जिले में प्रभारी मंत्री तैनात किए गए हैं, जो शाम 6 बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे. राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भिंड जिले में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण हस्तियों की मौजूदगी रहेगी. सरकार का उद्देश्य डॉ अंबेडकर के विचारों (सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों) को जन‑जन तक पहुंचाना है.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप द्वारा कैबिनेट बैठक में हुए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी#CabinetDecisionsMP
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संत रविदास जयंती को मिलेगा “सामाजिक समरसता वर्ष” का स्वरूप
कैबिनेट ने संत रविदास जयंती को एक दिन तक सीमित न रखकर 31 मार्च 2027 तक “सामाजिक समरसता वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. इस दौरान प्रदेशभर में सामाजिक एकता, समानता और सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सरकार इस अभियान के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है, जिसके निर्देश शीघ्र जारी किए जाएंगे.
किसानों को राहत: गेहूं खरीदी 9 अप्रैल से होगी शुरू
किसानों के लिए सबसे अहम फैसलों में गेहूं खरीदी की तारीख एक दिन पहले करने का निर्णय शामिल है. पहले जहां खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होनी थी, अब यह 9 अप्रैल से प्रारंभ होगी. सरकार का कहना है कि इससे किसानों को तेजी से लाभ मिलेगा. खरीदी प्रक्रिया में प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को दी जाएगी. पहले उनका पंजीकृत गेहूं खरीदा जाएगा, इसके बाद बड़े किसानों के लिए अलग‑अलग तिथियां तय की जाएंगी.
रिकॉर्ड पंजीकरण और बढ़ी खरीद सीमा का प्रस्ताव
इस वर्ष गेहूं खरीदी के लिए 78 लाख मीट्रिक टन की सीमा तय की गई है, जिसे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है. अब तक 19.04 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 3.5 लाख अधिक है. सरकार इसे किसानों का भरोसा करार दे रही है.
3627 उपार्जन केंद्र, 2625 रुपये समर्थन मूल्य
कैबिनेट ने बताया कि इस वर्ष 3627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं. गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस शामिल है. साथ ही बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो.
चना, मसूर और सरसों की भी होगी खरीदी
किसानों के हित में एक और बड़ा फैसला लेते हुए कैबिनेट ने गेहूं के साथ‑साथ चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीदी का भी निर्णय लिया है. सरकार का मानना है कि इससे दलहन‑तिलहन किसानों को बाजार अस्थिरता से राहत मिलेगी और उनकी आय सुरक्षित रहेगी.
नई सड़क परियोजनाओं से बुनियादी ढांचे को मजबूती
मोहन कैबिनेट ने राज्य में सड़क और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी. इटारसी‑बैतूल सेक्शन में 22 किलोमीटर लंबा टाइगर कॉरिडोर 758 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है. इसके अलावा निवाड़ी‑झांसी को जोड़ने वाला 15 किलोमीटर का बाईपास और ओरछा‑तिघियाला सड़क निर्माण परियोजना भी पास की गई है. इन परियोजनाओं पर कुल 631 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार ने इन मंजूरियों के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया.
उज्जैन में “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” सम्मेलन
3 अप्रैल को उज्जैन में “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें आईआईटी, इसरो और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए. कैबिनेट के अनुसार इस सम्मेलन ने उज्जैन को कालगणना के वैश्विक केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाई.
सम्मेलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और विचारक सुरेश सोनी भी उपस्थित रहे.
साइंस सेंटर और कर्क रेखा का नया केंद्र बिंदु
उज्जैन साइंस सेंटर का भी लोकार्पण किया गया, जिससे वैज्ञानिक सोच और शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. वहीं कर्क रेखा का कटाव केंद्र बिंदु अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोमला में स्थापित किया गया है. डोमला में ट्रस्ट द्वारा एक शाला का भी निर्माण कराया गया है, जो खगोलीय अध्ययन के लिए उपयोगी होगी.
एमपीयू सहयोग सम्मेलन और सांस्कृतिक साझेदारी
31 मार्च को आयोजित एमपीयू सहयोग सम्मेलन को सरकार ने एक नया प्रयोग बताया. इसमें राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देने और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इस अवसर पर पहला एमओयू काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र प्राधिकरण और महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति के बीच हुआ.
विक्रमादित्य महानाट्य और वैदिक घड़ी
वाराणसी में पहली बार सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे. मुख्यमंत्री को अयोध्या में भी ऐसा ही मंचन आयोजित करने का निमंत्रण दिया गया. इसके साथ ही उज्जैन और काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई.
गांधी सागर बांध से लिफ्ट इरिगेशन योजना
कैबिनेट ने मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध से भानपुरा तहसील के कोतमा क्षेत्र तक लिफ्ट इरिगेशन योजना को मंजूरी दी. 88.41 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 3500 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 120 गांवों के 1358 परिवारों को लाभ मिलेगा. सरकार के अनुसार जिले में अब 77 प्रतिशत भूमि सिंचित हो चुकी है.
भोपाल में फाइनेंशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट
राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से भोपाल में फाइनेंशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (FTRI) की स्थापना की जाएगी. इसके लिए सात मौजूदा शालाओं का एकीकरण किया जाएगा. यह संस्थान आरसीपीवी नरोना प्रशासन अकादमी की अधोसंरचना का उपयोग करेगा और अधिकारियों‑कर्मचारियों को वित्तीय प्रबंधन में प्रशिक्षित करेगा. सरकार का दावा है कि यह संस्थान देशभर में वित्तीय शोध और प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र बनेगा.
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