Roadside Cattle: मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से कांग्रेस विधायक अजय सिंह उर्फ राहुल भैया ने सरकार से मध्य प्रदेश के निराश्रित गौवंश मवेशियों के सड़कों पर आवारा घूमने और उनकी वजह से होने वाले सड़क हादसों पर चिंता जताई. इस पर जवाब देते हुए मोहन सरकार के मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगले दो सालों के बाद राज्य की सड़कों पर ऐसा एक भी आवारा पशु नहीं दिखेगा.
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मध्य प्रदेश में सड़कों पर विचरण कर रहे हैं करीब 10 लाख निराश्रित पशु
गौरतलब है ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में अजय सिंह ऊर्फ राहुल भैया और कैलाश कुशवाहा ने कहा कि सरकार द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग पर करोड़ों रुपए व्यय किए जाने के बावजूद मध्य प्रदेश में करीब 10 लाख निराश्रित पशु सड़कों पर विचरण कर रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अन्य सड़कों पर यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं.
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कांग्रेस ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया
अजय सिंह ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया, जिससे किसान और आमलोगों भारी परेशानी हो रही हैं. पशुपालन और डेयरी मंत्री लखन पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि निराश्रित गौवंश मवेशियों का व्यवस्थापन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग व नगरीय क्षेत्रों में नगरीय एवं आवास विकास विभाग के जिम्मे है और संबंधित विभागों द्वारा सतत कार्रवाई की जा रही है.
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गौशालाओं में 4.80 लाख आवारा पशुओं को उपलब्ध कराया गया है आश्रय
जवाब देते हुए पशुपालन और डेयरी मंत्री ने सदन को बताया कि मध्य प्रदेश में कुल 3,040 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गौसेवा योजना के अंतर्गत 2,325 गौशालाएं, अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा 703 तथा नगरीय निकायों द्वारा 12 गौशालाएं संचालित हैं. उन्होंने कहा कि इन गौशालाओं में लगभग 4.80 लाख अवारा पशुओं को आश्रय उपलब्ध कराया गया है और यह व्यवस्थापन एक सतत प्रक्रिया है.
प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025' को मिली स्वीकृति
मंत्री ने कहा कि निराश्रित गौवंश मवेशियों के बेहतर व्यवस्थापन के साथ गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025' को स्वीकृति प्रदान की गई है. इसके तहत न्यूनतम 5,000 गौवंश मवेशी क्षमता वाली स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु निवास) के लिए न्यूनतम 130 एकड़ राजस्व भूमि का प्रावधान किया गया है.
'मुझ पर विश्वास रखिए, दो साल बाद एक भी गौवंश सड़कों पर नहीं दिखेगा'
उन्होंने कहा कि गौशालाओं में उपलब्ध गौवंश मवेशियों के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गौवंश प्रतिदिन कर दी गई है. मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि, अगले दो वर्षों में नई गौशालाओं के निर्माण और व्यवस्थाओं के पूर्ण होने के बाद सड़कों पर निराश्रित गौवंश दिखाई नहीं देगा. मुझ पर विश्वास रखिए अगले दो साल बाद एक भी गौवंश सड़कों पर नहीं दिखेगा.
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