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MP Assembly Budget Session: मंत्री कैलाश ने धारावी से की भागीरथपुरा की तुलना, सिंघार ने अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा 

मंत्री कैलाश ने कहा कि मुंबई की जो धारावी है, ठीक उसी तरीके की स्थिति भागीरथपुरा की है. घटना के बाद मंत्रालय, पूरे अधिकारी, हमारे सारे प्रतिनिधि ने मिलकर काम किया है उनके साथ बैठकर प्लानिंग की. मरीजों का इलाज कर रहे थे, 2 टन पानी के नारियल बुलवाए. फिर भी 22 की जान नहीं बच पाई.

MP Assembly Budget Session: मंत्री कैलाश ने धारावी से की भागीरथपुरा की तुलना, सिंघार ने अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा 

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवे दिन भागीरथपुरा कांड छाया रहा. इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा यह घटना बहुत गंभीर और आत्मग्लानि वाली है, हम सब के लिए यह चिंता की बात भी है. वहां के लोगों ने शिकायत की थी, टेंडर बुलाने के बाद वहां पर काम नहीं हुआ. मुख्यमंत्री ने कमेटी बनाई और कमेटी में अधिकारी दोषी पाए गए्. इंदौर के लिए यह बहुत बड़ा कलंक है, पूरा शहर स्वच्छता में नंबर वन आता है. इंदौर में स्वच्छता को संस्कार में परिवर्तन करके स्वच्छ भारत मिशन को सफल करने का योगदान इंदौर कर रहा है. 

उन्होंने कहा कि भारी भरकम वोटों से जीता हूं. मथुरा जा रहा था. परिवार भी साथ में था, तभी घटना की जानकारी मिली तो तत्काल गाड़ी पलटाई और सीधे इंदौर आया. 29 तारीख को इंदौर पहुंचा, तत्काल आयुक्त सुदाम खाड़े को सूचना दे दी थी. पूरा अस्पताल मरीजों से भरा पड़ा हुआ था. रात भर में 250 लोगों को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया. हॉस्पिटल वाले मान नहीं रहे थे, लेकिन हमने उनसे कह कर इलाज मुफ्त करवाया. 

मंत्री कैलाश ने कहा कि मुंबई की जो धारावी है, ठीक उसी तरीके की स्थिति भागीरथपुरा की है. घटना के बाद मंत्रालय, पूरे अधिकारी, हमारे सारे प्रतिनिधि ने मिलकर काम किया है उनके साथ बैठकर प्लानिंग की. मरीजों का इलाज कर रहे थे, 2 टन पानी के नारियल बुलवाए. फिर भी 22 की जान नहीं बच पाई. उन्होंने कहा कि वहां के कुछ लोग राजनीति करना चाह रहे थे, डॉ भी घबरा गए थे. डेढ़ सौ सामाजिक कार्यकर्ता, पैरामेडिकल स्टाफ इलाज में लगे थे. इसलिए मुझे बुरा लगा. जिस जगह लोगों की मौत हुई वहां जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं. 

सरकार आंकड़ों को छिपाना चाहती है

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने खुद स्वीकार किया कि गलती हुई है. 27 करोड़ ठेकेदार को एडवांस दिया गया. योजनाएं बन रही है, लेकिन सरकार और सरकार के अधिकारी सांप की तरह रेंग रेंग कर चलाते हैं. उन्होंने कहा कि मैं इस बात को मानता हूं कि इन विषयों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस की ओर से हमारे नेताओं को भागीरथपुरा में रोकने का प्रयास किया गया. हम संवेदना प्रकट करने गए थे. इंदौर में मेरा भी कॉलेज था, कई साल वहां रहा हूं. सरकार आंकड़ों को छिपाना चाहती है. इंदौर ही नहीं, पूरे मध्यप्रदेश में यही स्थिती है. क्या सरकार साफ पानी नही दे सकती है. संविधान के अनुछेद 21 के तहत हर नागरिक को जीवन जीने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि स्वच्छ पानी जीने का अधिकार है, आप पानी देने की कृपा नहीं कर रहे, यह आपका संवैधानिक दायित्व है. 

पारदर्शिता क्यों नहीं रखी जा रही 

उमंग सिंघार ने कहा कि राइट टू वाटर, राइट टू लाइफ पर अगर चर्चा नहीं हो सकती है तो फिर किस पर चर्चा हो सकती है. गलती स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन चर्चा नहीं करना चाहते हैं. क्योंकि, चर्चा करेंगे इतिहास के पुराने पन्ने खोलेंगे, इतिहास बनाना चाहते हो तो आज का इतिहास बनाओ. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्यों अभी तक जवाबदार अधिकारियों पर आईपीसी की धाराओं के तहत मामला नहीं दर्ज किया गया. उन्हें सिर्फ ट्रांसफर क्यों कर दिया गया, छोटे अधिकारियों को निलंबित करके बड़े लोग बच जाते हैं. क्या विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी नहीं थी. महापौर, आयुक्त की जिम्मेदारी नहीं थी. अधिकारी टेंडर फाइनल नहीं करते हैं. फाइलों में साइन नहीं करते हैं, हर कार्ययोजना और जांच की रिपोर्ट सरकार पोर्टल पर क्यों नहीं देंना चाहती. जनता के लिए योजना बनी है, किसी मंत्री, ठेकेदार और कमीशनखोरों के लिए नही. पारदर्शिता क्यों नहीं रखी जा रही है.

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