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1 month ago

Anti Naxal Operations in India: भारत में नक्सल खात्मे की तारीख नजदीक आ गई है. नक्सलियों के खात्मे के काउंटडाउन में कुछ ही घंटे बचे हैं. केंद्र सरकार ने देशभर से नक्सल को खत्म करने की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन रखी थी. भारत लंबे समय तक नक्सलवाद का बुरा असर पड़ा है. छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे राज्य नक्सल से प्रभावित थे. पिछले दो साल में केंद्र ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई बड़े नक्सलियों को खत्म किया है. साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है. इसके अलावा राज्य सरकारें नक्सलियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नीतियां भी चला रही हैं.

नक्सल के खात्मे की डेडलाइन से एक दिन पहले यानी सोमवार को लोकसभा में इस पर चर्चा की जाएगी. वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी.

यहां पढ़ें नक्सल से जुड़ा अपडेट...

Bank, ATM and Post Office Open in Naxal Areas: बैंक, एटीएम खुले, हर 5 किमी के दायर में डाकघर भी पहुंचा

Bank Open in Naxal Effected Areas: केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित ज़िलों में 1,804 बैंक शाखाएं, 1321 एटीएम (ATM) और 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट स्थापित करके लोगों तक बैंकिंग सेवाओं की गहरी पहुंच सुनिश्चित की है. सरकार ने 90 जिलों में 5,899 डाकघर भी खोले हैं, जहां हर 5 किमी के दायरे में एक डाकघर मौजूद है. इससे उन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक भी बैंकिंग, डाक और पैसे भेजने (रेमिटेंस) जैसी सेवाएं सीधे पहुंच रही हैं, जो पहले नक्सलियों के प्रभाव में थे.

Loksabha Discuss about Naxal Ending: भारत को कई दशकों तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़नी पड़ी जंग

Shrikant Eknath Shinde in Loksabha on Naxal: लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कल्याण (महाराष्ट्र) से शिवसेना सांसद श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने कहा कि आपकी (विपक्ष) सरकार ने इस देश को रेड कॉरिडोर दिया. मोदी सरकार ने रेड कॉरिडोर को खत्म किया और देश को एक ग्रोथ कॉरिडोर दिया है. कई दशकों तक भारत को नक्सलवाद के खिलाफ जंग लड़नी पड़ी. गृह मंत्री ने 1 साल पहले सदन में कहा था कि हम 31 मार्च से पहले भारत से नक्सलवाद खत्म करेंगे. आज एक दिन पहले हम इस पर चर्चा कर रहे हैं.

शिवसेना सांसद ने कहा कि गृह मंत्री ने एक डेडलाइन तय करके उसके ऊपर चर्चा करने में हिम्मत दिखाई है. विपक्ष के लोग कहते थे कि नक्सलवाद कभी खत्म नहीं हो सकता. रेड कॉरिडोर विपक्ष शासित राज्यों में फैला. गृह मंत्री ने डेडलाइन तय की और नक्सलवाद खत्म करने का प्रयास किया. 1967 में पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव नक्सलबाड़ी में जो आंदोलन शुरू हुआ वह चार दशकों में 12 राज्यों के 200 जिलों तक फैल गया. अगर उस वक्त सही तरीके से सरकार ने हस्तक्षेप किया होता तो इसे 1967 में ही रोका जा सकता था.

उन्होंने आगे कहा कि नक्सलवाद फैला, क्योंकि उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने विकास पर ध्यान नहीं दिया. गरीब, किसान, आदिवासी समुदाय को हथियार उठाने पड़े. पिछड़ों, गरीबों का हमने विश्वास जीता है और उन्हें हथियार छोड़ने के लिए मजबूर किया है और उन्हें सशक्त बनाया है.

Mobile Network Reached for First Time: आजादी के बाद पहली बार पहुंचा मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल होते नक्सल इलाके

Mobile Tower Install in Naxal Areas: जैसे-जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में लाल आतंक का खात्मा होता गया, केंद्र सरकार ने भी वहां विकास योजनाएं चालू कर दीं. कई इलाके तो ऐसे थे, जहां मोबाइल टावर भी नहीं थे. वहां केंद्र ने पहले चरण में ₹4,080 करोड़ की लागत से 2,343 (2G) मोबाइल टावर लगवाए.  दूसरे चरण में ₹2,210 करोड़ के निवेश के साथ 2,542 टावरों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 1,154 टावर पहले ही लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा, 'आकांक्षी ज़िला' (Aspirational Districts) और '4G सैचुरेशन' योजनाओं के तहत, 8,527 (4G) टावरों को मंज़ूरी दी गई है; इनमें से क्रमशः 2,596 और 2,761 टावर अब चालू हो चुके हैं, जिससे मुख्य नक्सल प्रभावित इलाकों में संचार और खुफिया जानकारी जुटाने की पहुँच में ज़बरदस्त सुधार हुआ है.

Infrastructure Development in Naxals Area: नक्सल प्रभावित इलाकों में 12 हजार किमी सड़कों का निर्माण

Anti Naxal Operation: भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़कों का जाल बिछाकर और मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाकर इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है. इससे इन इलाकों तक पहुंच आसान हुई है, सुरक्षा संबंधी कार्रवाई तेज़ी से हो पाती है और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिला है. मई 2014 से अगस्त 2025 तक केंद्र ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 12,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया है, जबकि कुल 17,589 किलोमीटर सड़कों की परियोजनाओं को ₹20,815 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई है. इससे उन क्षेत्रों में भी हर मौसम में आवागमन और संपर्क सुनिश्चित हुआ है, जहां पहले पहुँचना मुश्किल था.

Sukma Naxal Affected Area: सुकमा में अब गोली की आवाज नहीं, विकास का बहार

Naxal Countdown in India: कभी गोलियों की गूंज से दहला बस्तर का सुकमा… अब विकास की नई कहानी लिख रहा है. जहां कभी पीएलजीए का सबसे मजबूत गढ़ था, वहां अब तिरंगा, स्कूल और सड़कें नजर आ रही हैं. नक्सलवाद के खात्मे की तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले, सुकमा में बदलाव की ये तस्वीर साफ नजर आ रही है. सुकमा जिला जो कभी नक्सलियों के कोर एरिया के तौर पर जाना जाता था. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Projects and Developments in Naxal Effected Area: 2014 के बाद 586 नए थाने बनाए गए

Naxal Ending in India: पिछले 8 सालों में (2017–18 से अब तक) ₹1,757 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और अब तक केंद्र सरकार द्वारा ₹445 करोड़ जारी भी किए जा चुके हैं. 2014 से अब तक कुल 586 मजबूत थाने बनाए गए हैं. विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत ₹3,817.59 करोड़ दिए गए हैं. केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (ACALWEMS) योजना के तहत, पिछले 10 सालों में कैंप के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹125.53 करोड़ और अस्पतालों को बेहतर बनाने या नए अस्पताल बनाने के लिए ₹12.56 करोड़ जारी किए गए हैं.

केंद्र ने नक्सल प्रभावित राज्यों को दी आर्थिक सहायता

दिसंबर 2025 में पीआईबी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले 11 वर्षों में सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के तहत नक्सल प्रभावित राद्यों को ₹3,331 करोड़ जारी किए. यह पिछले 10 सालों की तुलना में फंड में 155% की बढ़ोतरी की गई थी. विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना (SIS) के तहत, केंद्र सरकार ने राज्य विशेष बलों (SF) और विशेष खुफिया शाखाओं (SIB) को मज़बूत करने के लिए ₹371 करोड़ और शुरुआती चरण में 246 मजबूत पुलिस थानों (FPS) के लिए ₹620 करोड़ मंज़ूर किए. इस योजना को 2026 तक बढ़ाया गया है. बढ़ाई गई अवधि में SF, SIB और ज़िला पुलिस को और बेहतर बनाने के लिए ₹610 करोड़ और 56 अतिरिक्त FPS के लिए ₹140 करोड़ मंजूर किए गए हैं.

Naxal Surrender: टॉप माओवादी कमांडर सुरेश का विजयवाड़ा में सरेंडर

Top Maoist commander Suresh Surrender: नक्सलियों को खत्म करने की डेडलाइन में कुछ घंटे ही बचे हैं. दूसरी ओर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में टॉप माओवादी कमांडर सुरेश और आठ अन्य कैडरों ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता के सामने सरेंडर कर दिया. सुरेश उर्फ चेल्लूरी नारायण राव CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और आंध्र-ओडिशा सीमा स्पेशल ज़ोनल कमेटी का सचिव था. सुरेश ने माओवादी आंदोलन में लगभग 36 साल बिताए और इसके टॉप नेताओं में से एक थे. अन्य आठ कैडरों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्लाटून कमांडर, एरिया कमेटी के सदस्य और पार्टी सदस्य शामिल थे.

आंध्र प्रदेश सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के अनुसार, सुरेश को 25 लाख रुपये मिलेंगे. अन्य कैडरों को 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का इनाम मिलेगा. DGP ने सरेंडर करने वाले सभी नौ सदस्यों को 20,000 रुपये की तत्काल राहत राशि भी दी.

Naxals Financial Choking: नक्सलियों की आर्थिक नाकेबंदी

Anti Naxal Operation: केंद्र सरकार ने NIA में एक खास विंग बनाकर नक्सलियों की फंडिंग को प्रभावी ढंग से रोक दिया है. इस विंग ने ₹40 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त की है, जबकि राज्यों ने ₹40 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त की और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹12 करोड़ की संपत्ति अटैच की. एक साथ की गई कार्रवाई से शहरी नक्सलियों को नैतिक और मनोवैज्ञानिक रूप से गहरा नुकसान पहुंचा और उनके सूचना युद्ध नेटवर्क पर सरकार की पकड़ और मज़बूत हुई है.

Action against Naxalites: 2024-25 नक्सलियों के खिलाफ एक्शन

केंद्र सरकार ने बताया कि 2025 में 317 नक्सलियों को मार गिराया था और 862 को गिरफ़्तार किया. 1,973 ने आत्मसमर्पण किया था. वहीं, 2024 में 290 नक्सलियों को ढेर किया और 1,090 को गिरफ्तार किया. साथ ही 881 ने आत्मसमर्पण किया. 2024-25 में 28 बड़े नक्सल नेताओं को मार दिया.

Naxal Surrender: आज लोकसभा में नक्सल पर होगी चर्चा, 31 मार्च नक्सलियों के खात्मे की है डेडलाइन

Loksabha Discuss Naxal Problem: लोकसभा में सोमवार को देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी. यह चर्चा सरकार द्वारा नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए निर्धारित 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले हो रही है. लोकसभा सचिवालय ने नियम 193 के तहत सोमवार को "देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों" पर चर्चा सूचीबद्ध की है, जिसमें मतदान शामिल नहीं है. इस नियम के तहत अल्पकालिक चर्चा के लिए सरकार को जवाब देना आवश्यक है. चर्चा की शुरुआत टीडीपी सांसद बायरेड्डी शबरी और शिवसेना सदस्य श्रीकांत शिंदे करेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का पूरी तरह से उन्मूलन 31 मार्च, 2026 तक कर दिया जाएगा.

Will Naxalism End after Naxalites Surrender: क्या नक्सलियों के सरेंडर के बाद सच में खत्म हो जाएगा लाल आतंक?

Ending of Red Terror in India: भारत में नक्सलियों के पूरी तरह खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च नजदीक आ गई है. पापा राव जैसे खूंखार नक्सली भी हथियार डाल चुके हैं, लेकिन कई नक्सली अभी भी सक्रिय हैं. आखिरी सप्ताह में सुरक्षाबलों के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं. जो कभी बंदूकों के दम पर जंगल में अपनी सरकार चलाने और रेड कॉरिडोर बनाने का दावा करते थे, वे दावे अब हवा हो चुके हैं. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Naxalites in Chhattisgarh: लाल आतंक का खत्म होता दौर, अभी भी कुछ सक्रिय नक्सली बचे

Naxal in Chhattisgarh: देश में नक्सली समस्या से मुक्ति के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय की गई है. पिछले दो साल में कई बड़े नक्सली ढेर हो चुके हैं या फिर, सरेंडर कर चुके हैं. राज्य सरकारों ने नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास नीति भी बनाई है, ताकि वह समर्पण कर सकें और सुरक्षाबलों का सामना न करना पड़े. देश में कई नक्सली अभी भी बचे हैं, ऐसे में उसके पास पुनर्वास में शामिल होने के अलावा मुठभेड़ में सुरक्षा बल जवानों का सामना करने का ही विकल्प बचा था.

हालांकि, अब भी नक्सलियों की पामेड़ एरिया कमेटी, जगरगुंडा में सक्रिय कुछ नक्सली और माड़ एरिया कमेटी में सक्रिय कुछ नक्सलियों को समय रहते वापस लाने की चुनौती सरकार के पास बनी हुई है. कहा जा रहा है कि इनकी संख्या काफी सीमित है, लेकिन इसमें नक्सलियों के बटालियन के कुछ कदर अभी भी हथियारबंद हैं.

Hidma and Basvaraju Encounter: हिड़मा और बसवराजू का हुआ था एनकाउंटर

Naxal Encounter: नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश की सीमा से लगे घने मरेडमल्ली जंगलों में मुठभेड़ में खूंखार नक्सली माडवी हिड़मा मारा गया था. मई 2025 में बसवराजू उर्फ नंबाला केशव राव अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों के हाथों मुठभेड़ में मारा गया था. इससे अलावा भी कई नक्सली एनकाउंटर में ढेर हो चुके हैं.

Naxalite Devji Surrender: देवजी ने किया था तेलंगाना में सरेंडर

Naxal Surrender: पाराव से पहले 6 करोड़ के इनामी और 135 जवानों का हत्यारे नक्सली देवजी ने इसी साल फरवरी माह में तेलंगाना में सरेंडर किया था. करीब 62 साल के नक्सली देवजी को तिप्पिरी तिरुपति उर्फ संजीव पल्लव नाम से भी जाना जाता है. देवजी के साथ ही नक्सली मल्ला राजिरेड्डी ने भी समर्पण किया था. इसके अलावा कई इनामी नक्सली आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नक्सली सरेंडर कर चुके हैं.

Chhattisgarh Naxal: इस दिन वेल्ला मोडियम उर्फ़ मंगू मोडियम हुआ था ढेर

नक्सलियों का इंटेलिजेंस प्रमुख वेल्ला मोडियम उर्फ़ मंगू मोडियम 3 दिसंबर को ढेर हुआ था. मुठभेड़ में मंगू मोडियम समेत 12 नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था.

Chhattisgarh Naxal: खूंखार नक्सली माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था

18 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश की सीमा पर खूंखार नक्सली माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. हिड़मा पर एक करोड़ रुपये का इनाम था. हिड़मा पर 150 से ज्यादा जवानों को मारने का आरोप था. सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे समेत छह नक्सलियों को मार गिराया था.

Naxal Commander Papa Rao Surrender: मोस्ट वॉन्टेड नक्सल कमांडर पापाराव ने 25 मार्च को किया था सरेंडर

Naxal Free India: मोस्ट वॉन्टेड नक्सल कमांडर पापाराव ने 25 मार्च को अपने 17 नक्सली साथियों के साथ NDTV की टीम की मदद से बीजापुर जिले में समर्पण किया था. वह रातभर जंगल के रास्ते चलकर सरेंडर करने प्रशासन के पास पहुंचा. नक्सल कमांडर पापाराव का पूरा नाम सुन्नम पापाराव है. वह मंगू दादा फर्फ चंन्द्रन्ना के नाम से भी मशहूर है. पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Naxalites Get Mobile: अब लाल सलाम नहीं, लाइक और सब्सक्राइब

Chhattisgarh Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में बंदूक छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुए पूर्व नक्सलियों के लिए सरकार एक ऐसी योजना लाई है, जो उनकी दुनिया को पूरी तरह 'अपडेट' कर देगी. पुनर्वास (Rehabilitation) की प्रक्रिया से गुजर रहे इन लोगों के लिए अब मोबाइल सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने का 'डिजिटल पुल' बनने जा रहा है. सरकार का मानना है कि जो लोग सालों तक घने जंगलों में बाहरी दुनिया से कटकर रहे, उन्हें समाज की रफ़्तार के साथ दौड़ने के लिए स्मार्टफोन से बेहतर कोई ज़रिया नहीं हो सकता. अब ये पूर्व नक्सली अपनी नई ज़िंदगी की रील बनाएंगे, देश-दुनिया की खबरें देखेंगे और सबसे बड़ी बात—पुरानी कड़वी यादों से पीछा छुड़ाकर 'डिजिटल एंटरटेनमेंट' की दुनिया में खुद को व्यस्त रखेंगे. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Jhiram Ghati Naxal Attack: झीरम घाटी में नक्सील हमला, 13 साल बाद भी जांच अधूरी

Sukma Naxalites Attack: 31 मार्च को देश से नक्सलवाद के खात्मे की समयसीमा तय की गई है. लेकिन जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, छत्तीसगढ़ के बस्तर की झीरम घाटी का नाम आज भी एक खामोश सिहरन पैदा कर देता है. 13 साल बाद भी, यह अतीत दबने को तैयार नहीं है. 25 मई 2013 को झीरम घाटी का इलाका एक कत्लेआम का मैदान बन गया था. नक्सलियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा' से लौट रहे नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था और अंधाधुंध फायरिंग में 32 लोगों की जान चली गई थी. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Naxal Surrender: सरेंडर करने वालों ने नक्सली नेताओं से भी की हथियार डालने की अपील

Anti Naxal Operation Campaign: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) समेत पूरे देश को 31 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार ने नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य तय क्या है. इस बीच आत्मसमर्पित नक्सलियों ने अपने नेताओं को मुख्य धारा में वापिस लाने के लिए पत्र लिख कर हिंसा छोड़ने की अपील की है. पत्र में संदेश दिया गया है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का वक्त आ चुका है, अब हिंसा छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना ही सबसे बेहतर होगा. पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें एक दिन पूर्ण सरेंडर करने वाले नक्सली रेनू, राधिका और संजू ने संयुक्त रूप से अपने साथियों से अपील करते हुए कहा है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का वक्त आ चुका है. अब हिंसा छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना ही सबसे बेहतर है. पत्र के माध्यम से अपील करते हुए अपने साथियों के नाम का जिक्र भी किया गया है, जिसमें रूपी चंदर समेत कई नाम शामिल हैं. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Sukma Naxal Encounter: सुकमा में 5 लाख का इनामी नक्सली कमांडर मारा गया

Sukma Encounter Naxalite Moochaki Kailash Killed: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाके में रविवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक इनामी माओवादी को मार गिराया गया. मारा गया नक्सली प्लाटून नंबर-31 का सेक्शन कमांडर और PPCM मूचाकी कैलाश था, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था. सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन को नक्सलियों के 31 मार्च 2026 तक खात्मे की डेडलाइन के तहत अंजाम दिया गया. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

बस्तर में वेंटीलेटर पर माओवाद, साल भर में सिमटा 4 दशकों का उग्रवाद

Maoist Ending in Bastar Chhattisgarh: करीब चार दशकों तक नक्सलवाद और माओवादियों के केंद्र में रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद अब पूरी तरह से वेंटीलेटर पर आ गया है. केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त एंटी नक्सल ऑपरेशन का असर है कि महज एक साल के भीतर पिछले 4 दशकों से फैला माओवादी संगठनों का उग्रवाद सिमट गया है और अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है. दंतेवाड़ा जिले में अब तक 1659 माओवादियों ने आत्म- समर्पण कर मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं. वहीं 1720 माओवादियों की गिरफ्तारी की गई. अलग-अलग मुठभेड़ो में कुल 260 माओवादी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. इन मुठभेड़ में 335 हमारे बहादुर जवानो ने अपनी शहादत दी है, वही 351 आम ग्रामीण नक्सलियों की बर्बरता और क्रुर दंश में मारे गए हैं. क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर

Lok Sabha to Discuss Government Efforts: लोकसभा में आज चर्चा होगी

Amit Shah on Naxal: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने की समय सीमा 31 मार्च रखी है. उससे एक दिन पहले लोकसभा में सोमवार को देश को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी. इस चर्चा की शुरुआत तेदेपा सांसद बायरेड्डी शबरी और शिवसेना सदस्य श्रीकांत शिंदे करेंगे. नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों की एक नई समीक्षा के बाद देश में नक्सली उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात हो गई है. हाल में केंद्र सरकार द्वारा नौ राज्यों (जिनमें 38 जिले शामिल हैं) के साथ मिलकर एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना की व्यापक समीक्षा की गई. ये राज्य झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल हैं.

Anti Naxal Operation: 2014 में 126 जिले नक्सल से थे प्रभावित

Chhattisgarh Naxal: केंद्र सरकार ने जनवरी 2024 से नक्सल के खिलाफ तेजी से अभियान शुरू किए थे. छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में नक्सल विरोधी अभियानों के तहत सुरक्षाबलों ने कई नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया था. केंद्र ने बताया कि भारत में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 थी, जो 2025 में घटकर सिर्फ 11 (2025) रह गई. सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या 36 से घटकर सिर्फ 3 रह गई थी. अब 2026 में अब 'लाल आतंक' यानी नक्सलियों का प्रभाव अब इन जिलों में लगभग खत्म हो चुका है.

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