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मध्य प्रदेश के इस गांव को कहते हैं 'मिनी केरल', 1955 में शुरू हुई गांव बसाने की कहानी

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित ईंटखेड़ी गांव एक अनोखा उदाहरण है जो केरल की हरियाली, स्वच्छता, अनुशासन और शिक्षा की मिसाल पेश करता है. इस गांव को "मिनी केरल" भी कहा जाता है.

मध्य प्रदेश के इस गांव को कहते हैं 'मिनी केरल', 1955 में शुरू हुई गांव बसाने की कहानी

Mdhya Pradesh Nature Village: कृषि प्रधान मध्य प्रदेश में एक गांव प्रकृति की गोद में बसा है. यह रायसेन जिले में है, जिसे लोग मिनी केरल (Mini Kerala) के नाम से भी पुकारते हैं. केरल की तरह हरियाली, स्वच्छता, अनुशासन और शिक्षा की मिसाल पेश करता यह गांव ईंटखेड़ी है. यहां के हरे-भरे पेड़, पक्की सड़कें, फलदार बगीचे और शांत वातावरण किसी का भी मन मोह लेते हैं. खास बात यह है कि गांव में अपराध लगभग शून्य है और हर घर से कोई न कोई युवा सेना, स्वास्थ्य, शिक्षा या अन्य शासकीय सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा कर रहा है.

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केरल जैसा यह गांव कैसे बना, इसकी कहानी वर्ष 1955 से शुरू होती है. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Former PM Pt Nehru) की सरकार ने एक विशेष परियोजना के तहत केरल से मलयाली परिवारों को मध्य प्रदेश में बसाने का निर्णय लिया.

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वर्ष 1955 में ईंटखेड़ी पहुंचे थे मलयाली परिवार

आज से करीब सात दशक पहले ईंटखेड़ी (IintKhedi) गांव लगभग वीरान हुआ करता था. वर्ष 1955 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में केंद्र सरकार की केंद्रीय मशीनीकृत खेती परियोजना के तहत केरल के तत्कालीन त्रावणकोर–कोचीन राज्य से 200 से अधिक मलयाली परिवारों को यहां बसाया गया. इन लोगों को टैपिओका और धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था.

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हर परिवार को 12 एकड़ जमीद दी

शुरुआत में संसाधनों की कमी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई परिवार वापस लौट गए, लेकिन जो परिवार यहां टिके रहे. उन्होंने मेहनत और अनुशासन के बल पर अपनी नई पहचान बनाई. सरकार से हर परिवार को 12-12 एकड़ जमीन दी गई थी. सरकार ने गांव में अस्पताल भी बनाकर दिया. यह गांव पूरी तरह हरियाली से घिरा हुआ है.

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70 प्रतिशत लोग करते हैं सरकारी नौकरी

गांव में सर्वसमाज के लोग रहते हैं और चर्च और मंदिर दोनों हैं. लगभग 70 प्रतिशत लोग यहां नौकरी करने वाले हैं, जिसमें ज्यादातर सेना में शामिल होते हैं. अभी गांव की आबादी लगभग 1000 के करीब है. जब मलयाली परिवार भी पूरी तरह से बस गए तो वह केरल से ही देवी प्रतिमा ले आए और एक शानदार मंदिर बनाया था.

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