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This Article is From Apr 01, 2026

ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज को हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका, इन हॉउस सीधी भर्ती रद्द; जानिए क्यों बताया अवैध

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज की सीधी भर्ती प्रक्रिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अवैध बताते हुए रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति के पद को सीधी भर्ती में बदलना अवैध है.

ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज को हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका, इन हॉउस सीधी भर्ती रद्द; जानिए क्यों बताया अवैध

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (Gajara Raja Medical College) द्वारा की जा रही सीधी भर्ती प्रक्रिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर खंडपीठ से बडा झटका लगा है. कोर्ट ने इस प्रक्रिया को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि बगैर प्रक्रिया अपनाए पदोन्नति के पद को सीधी भर्ती में बदला जाना अवैध है. इस तरह हाईकोर्ट ने  गजराराजा मेडिकल कॉलेज द्वारा 6 फरवरी 2026 को जारी 'इन-हाउस' सीधी भर्ती के विज्ञापन को रद्द कर दिया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ टिप्पणी की कि सीधी भर्ती में पूर्व सेवा रिकॉर्ड का कोई  महत्व नहीं होता, जिससे पदोन्नति की कतार में लगे उम्मीदवारों के निहित अधिकार प्रभावित होते हैं. पदोन्नति के अवसर समाप्त करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.

डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज की भर्ती को दी थी चुनौती

मेडिकल कॉलेज द्वारा सीधी भर्ती के लिए निकाले गए विज्ञापन और प्रक्रिया को याचिकाकर्ता डॉ. आशीष कौशल ने चुनौती देते हुए अपने एडवोकेट एसएस गौतम के माध्यम से याचिका दायर की थी. याचिका में ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर के रिक्त पद को विभागीय पदोन्नति से भरने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है और इस पद पर पदोन्नति का पात्र है. उन्होंने पदोन्नति के लिए स्पष्ट मूल्यांकन प्रक्रिया अधिसूचित करने के निर्देश भी मांगे थे.

कॉलेज ने अपने पक्ष में क्या कहा

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान गजराराजा मेडिकल कॉलेज और मप्र शासन ने  अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट में 'आरबी राय' प्रकरण लंबित होने और यथास्थिति आदेश के कारण पदोन्नति संभव नहीं हो पा रही थी. इसी कारण आपात स्थिति में 'इन-हाउस' सीधी भर्ती का विकल्प अपनाया गया. यह भी कहा गया कि भर्ती केवल इंटर्नल  उम्मीदवारों के लिए थी, इसलिए इस प्रक्रिया से  किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे. लेकिन  हाईकोर्ट ने शासन और कॉलेज की इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया और इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया.

अदालत ने निर्देश दिए कि कॉलेज 'पहले पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करें. यदि इसके बाद में भी कानूनी बाधा बनी' रहती है और सीधी भर्ती करनी पड़े तो नया विज्ञापन जारी किया जाए, जिसमें चयन के मापदंड पदोन्नति के समान ही हों. इससे वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड की अनदेखी नहीं की जा सकेगी.

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