देश में एलपीजी की किल्लत के बीच भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है, जहां मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों में औसतन 4.80% वृद्धि को मंजूरी दे दी है. यह फैसला 26 मार्च 2026 को जारी टैरिफ आदेश में लिया गया.
दरअसल, बिजली वितरण कंपनियों ने इस वर्ष टैरिफ में 10.19% वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आयोग ने इसे कम करते हुए 4.80% तक सीमित रखा. इस निर्णय को उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली कंपनियों की आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
इन उपभोक्ताओं को मिली राहत
हालांकि, आयोग ने कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं को राहत भी दी है. घरेलू निम्न आय वर्ग (LT4) के उपभोक्ताओं के टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं होगी. मेट्रो रेल (LT9) श्रेणी के लिए भी दरें यथावत रहेंगी. यानी इस फैसले से इन वर्गों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
टैरिफ आदेश की प्रमुख विशेषताएं
नए टैरिफ आदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव और सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो इस प्रकार है.
- कई श्रेणियों के उपभोक्ताओं के न्यूनतम प्रभार समाप्त
- उच्च एवं अतिरिक्त उच्च दबाव उपभोक्ताओं के लिए kWh आधारित बिलिंग जारी
- रात्रिकालीन उपयोग पर छूट पहले की तरह लागू
- उपभोक्ताओं को मीटरिंग प्रभार से राहत
- ऑनलाइन और शीघ्र भुगतान पर प्रोत्साहन जारी
- पावर फैक्टर और लोड फैक्टर प्रोत्साहन यथावत
स्मार्ट मीटर और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा
आयोग ने ऊर्जा दक्षता और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए हैं. इसके तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को ऑफ पीक अवधि में 20% तक छूट की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा ग्रीन टैरिफ में कमी की गई है, जिससे हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिल सके. इसके अलावा, ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त अधिभार में कमी की गई है.
तकनीकी सुधार के लिए R&D फंड
बिजली कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आयोग ने R&D फंड की व्यवस्था भी की है. इससे तकनीकी सुधार, लागत नियंत्रण और बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी.
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उपभोक्ता और कंपनियां दोनों का रखा ध्यान
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह टैरिफ आदेश उपभोक्ताओं को राहत देने के साथसाथ बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. पूरे टैरिफ आदेश की विस्तृत जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है.मध्य प्रदेश में बिजली दरों में यह वृद्धि भले ही सीमित है, लेकिन इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर जरूर पड़ेगा.
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