Banana Farming in Burhanpur: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का बुरहानपुर (Burhanpur) जिला अपनी केला खेती के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां की पहचान अब बदलने जा रही है. दरअसल, बोरसर गांव की एक साधारण किसान परिवार की बेटी खुशबू पाटिल ने अपनी उच्च शिक्षा और कॉर्पोरेट अनुभव का इस्तेमाल मिट्टी की खुशबू और किसानों की तकदीर बदलने के लिए शुरू कर दिया है. खुशबू ने लाखों रुपये की निजी नौकरी छोड़कर 'केला चिप्स' का स्टार्टअप शुरू किया है, जो आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.
खुशबू पाटिल ने एमबीए (MBA) की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले दो वर्षों से एक नामी कॉर्पोरेट कंपनी में ऊंचे पद पर काम कर रही थीं. शहर की सुख-सुविधाएं और अच्छा वेतन होने के बावजूद, उनके मन में हमेशा अपने गांव और किसानों के प्रति एक टीस रहती थी. उन्होंने देखा कि कड़ी मेहनत के बावजूद आंधी-तूफान और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण केला किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल पाता. इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए खुशबू ने अपनी नौकरी को अलविदा कहा और गांव लौट आईं.

बिना सरकारी मदद के खड़ा किया अपना साम्राज्य
आज के दौर में जहां युवा स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरकारी लोन या सब्सिडी का इंतजार करते हैं. वहीं, खुशबू ने एक अलग मिसाल पेश की है. उन्होंने बिना किसी सरकारी अनुदान या बैंक लोन के अपने दम पर यह स्टार्टअप शुरू किया. उनका मुख्य उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना और किसानों को बिचौलियों से बचाकर उनके केले का उचित मूल्य दिलाना है.
अब देश भर से मिल रहे हैं ऑर्डर
खुशबू ने अपनी एमबीए की पढ़ाई के दौरान सीखी गई मार्केटिंग और बिजनेस रणनीतियों को चिप्स बनाने की तकनीक के साथ जोड़ा. इसका परिणाम यह हुआ कि उनके द्वारा बनाए गए 'बुरहानपुर केला चिप्स' की गुणवत्ता और स्वाद की चर्चा अब मध्य प्रदेश से बाहर भी होने लगी है. वर्तमान में उन्हें देश के विभिन्न राज्यों से बड़े-बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं. खुशबू का कहना है कि राह में चुनौतियां बहुत आईं, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया.
केले के तने और पत्तों से भी बनेंगे उत्पाद
खुशबू का विजन केवल चिप्स तक सीमित नहीं है. वे आने वाले समय में केले से बनने वाले अन्य 'बाय प्रोडक्ट्स' पर भी काम कर रही हैं. उनकी योजना केले के तने और पत्तों से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने की है, ताकि केले के पौधे का कोई भी हिस्सा व्यर्थ न जाए. इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि गांव के मजदूरों और महिलाओं को साल भर रोजगार मिल सकेगा.
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निजी कंपनियों में नौकरी कर रहे युवाओं को सलाह देते हुए खुशबू कहती हैं कि यदि आपके मन में बिजनेस करने की चाहत है, तो सही समय का इंतजार छोड़कर मैदान में उतरें. अपनी जड़ों की ओर लौटना और स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करना ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है.
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