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स्वच्छ शहर इंदौर में 'जहरीले पानी': 11 लोगों ने गवा दी अपनी जान, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- 'कुछ लोगों की डेथ नेचुरल...'

Indore Contaminated Water Case: इंदौर में दूषित पानी पीने से हड़कंप मच गया है. अब तक 11 लोगों की मौत और 162 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ मौतें नेचुरल हैं, जबकि सरकार ने 4 मौतों की ही पुष्टि की है.

स्वच्छ शहर इंदौर में 'जहरीले पानी': 11 लोगों ने गवा दी अपनी जान, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- 'कुछ लोगों की डेथ नेचुरल...'

Indore Water Contamination: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गंदा पानी पीने की वजह से 11 लोगों ने अपनी जान गवा दी, जिनकी पुष्टि उनके परिजन कर चुके हैं. पीड़ित परिवारों का कहना है कि मौतें गंदा पानी पीने से हुई हैं, लेकिन सरकार इस कारण को मानने से बच रही है. इस बीच, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान सामने आया है कि कुछ मौतें नेचुरल हुई हैं.

अभी भी प्रशासनिक तौर पर 4 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है.  वहीं 162 लोग अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिसमें से आईसीयू में 26 मरीज हैं.

इन 11 लोगों ने अपनी जान गवा दी

  • नंदलाल पाल (75 वर्ष)- आधिकारिक पुष्टि
  • उर्मिला यादव- (60 वर्ष)- आधिकारिक पुष्टि
  • उमा कोरी (31 वर्ष)
  • मंजुला (74 वर्ष)
  • ताराबाई कोरी (70 वर्ष)- आधिकारिक पुष्टि
  • गोमती रावत (50 वर्ष) 
  • सीमा प्रजापत (50 वर्ष)
  • संतोष बिगोलिया 
  • जीवन लाल बरेडे (80 वर्ष)
  • अव्यान साहू (5 माह)
  • शंकर भाया (70 वर्ष)

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "मैं इस समय मृतकों की संख्या पर टिप्पणी नहीं कर सकता... हालांकि हम मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये प्रति परिवार सहायता प्रदान करेंगे. हम सभी मरीजों का इलाज कर रहे हैं. हमने पांच एम्बुलेंस तैनात की हैं... कल से आने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है. कल रात (31 दिसंबर) से 60 मरीज आए हैं, जिनमें से आधे से अधिक को प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया है. जिनकी हालत गंभीर है, उन्हें अस्पताल भेजा गया है. हमने अरविंद अस्पताल में 100 बिस्तर उपलब्ध कराए हैं और एमवाई अस्पताल में 100 बिस्तरों वाला पूरा वार्ड आवंटित किया है... कुछ बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल भेजा गया है..."

उन्होंने आगे कहा, 'यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बस्ती है, इसलिए हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसी को भी इलाज पर पैसा खर्च न करना पड़े. मैं यहीं हूं, और जब तक और मरीज नहीं आते, हम भागीरथपुरा में ही रहेंगे और पूरी स्थिति को संभालेंगे... दूषित पानी के स्रोत की पहचान कर ली गई है और उसका उपचार किया जा रहा है... एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी. लोगों को पानी पीने से पहले उबाल लेना चाहिए. हमने 50 टैंकर तैनात किए हैं और लोगों को नर्मदा का पानी उपलब्ध करा रहे हैं. साथ ही हमने हर घर में क्लोरीन भी वितरित की है..." 
 

बनाई गई 21 टीमें

बता दें कि भागीरथपुरा में  31 दिसम्बर को भी सघन उपचार जारी रहा. स्वास्थ सेवाओं को विस्तार देते हुए चिकित्सकों और सर्वे दलों की संख्या बढाई गई. भागीरथपुरा से लगे हुए अन्य क्षेत्रों में भी संक्रमण फैलने की सूचना पर विभाग ने 21 टीमें बनाई गयी. इस टीम में  डॉक्टर, पैरामेडिकल, ए.एन.एम. आशा कार्यकर्ता शामिल किए गए हैं.

तैनात किए गए 11 एम्बुलेंस

आशा कार्यकर्ता द्वारा प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे किया जा रहा है. इस सर्वे में  आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सहयोग प्रदान कर रही है. घर-घर जाकर उबला पानी पीने, बाहर का भोजन व बाहर के कटे फल न खाने की समझाईश भी दे रही हैं. साथ ही 11 एम्बुलेंस तैनात किए गए. वहीं क्षेत्र में चिकित्सकों की 24x7 ड्यूटी लगाई गई है.

जो मरीज निजी चिकित्सालयों में जा रहें हैं, वहां पर भी निःशुल्क उपचार, जांच और औषधि के लिए मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया है.

जिला प्रशासन द्वारा निजी चिकित्सालयों में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के साथ-साथ राजस्व अधिकारी भी समन्वय के लिए तैनात किए गए. वहीं सभी निजी चिकित्सालयों में निःशुल्क उपचार के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा दिए गए. जिनका पालन करवाया जा रहा है.

162 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती

31 दिसम्बर तक 7 हजार 992 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 39 हजार 854 लोगों की जांच की गई, जिसमें से लगभग 2 हजार 456 संदेहास्पद मरीज मिले. बता दें कि प्रभावितों को वहीं स्थल पर प्राथमिक उपचार दिया गया.

31 दिसम्बर तक 212 प्रभावितों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिसमें 50 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है. अभी अलग-अलग अस्पतालों में 162 मरीज भर्ती है, इनमें से आईसीयू में 26 मरीज भर्ती है.

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