Indian Prisoner in Pakistan Jail: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के गांव खैरलांजी महकेपार के रहने वाले प्रसन्नजीत रंगारी की पाकिस्तान की जेल से सकुशल वतन वापसी हुई है. वह बीते सात साल से लापता था. पाक की जेल से छूटकर 6 फरवरी 2026 की रात को प्रसन्नजीत अपने घर पहुंचा है. सालों से लापता बेटे के आने से परिवार को राहत तो मिली, लेकिन बीते वर्षों की उसकी कहानी सबकी आंखें नम कर देने वाली है.
पाकिस्तान की जेल में बतौर भारतीय कैदी उसके साथ कैसा बर्ताव हुआ? वहां रहना-खाना, पाक के पंजाब प्रांत के लाहौर में स्थित कोट लखपत जेल में पहुंचने से लेकर रिहाई तक का सफर कैसा रहा? प्रसन्नजीत का पता कैसे चला कि वो पाकिस्तान की जेल में बंद है? इकलौते बेटे के लापता होने के बाद माता-पिता पर क्या बीती? आइए जानते हैं इन्हीं सारे सवालों के जवाब?
Prasannajit Rangari: पाकिस्तान की जेल में कैसे पहुंचा प्रसन्नजीत?
जीजा राजेश कहते हैं कि प्रसन्नजीत साल 2019 में अचानक घर से कहीं चला गया था. काफी प्रयासों के बाद उसका कोई पता नहीं चला. अब पाकिस्तान की जेल से छूटकर आने पर प्रसन्नजीत ने उनको बताया कि वो दिल्ली से एक ट्रेन में बैठा था. जब लंबे सफर के बाद रेलवे स्टेशन पर उतरा तो उसे बताया कि वह पाकिस्तान में है. उसे पकड़कर पाकिस्तान के लाहौर की जेल में डाल दिया गया, जहां वो कई सालों तक रहा.

कैसे पता चला प्रसन्नजीत पाक की जेल में है?
राजेश कुमार के अनुसार लापता होने के बाद लंबे समय तक प्रसन्नजीत के बारे में कोई सुराग नहीं लगा. परिजनों ने तो यह तक मान लिया था कि शायद वह अब जिंदा ही नहीं है. 31 दिसंबर 2021 को गांव खैरलांजी महकेपार के डेविड भाई के मेडिकल स्टोर पर अनजान व्यक्ति का कॉल आया. उसने खुद को जम्मू-कश्मीर के कठुआ का रहने वाला कुलदीप सिंह बताया और फोन पर बोला कि गांव खैरलांजी महकेपार का प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है. वहां उसका नाम सुनील अदे है. 1 अक्टूबर, 2019 को पाकिस्तान के बटापुर से हिरासत में लिया गया था.
प्रसन्नजीत की वतन वापसी के लिए पांच साल का इंतजार
डेविड भाई के मेडिकल स्टोर पर जम्मू-कश्मीर के कुलदीप सिंह का कॉल आने के बाद प्रसन्नजीत के जीजा राजेश व बहन संघमित्रा ने कुलदीप के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह खुद भी पाकिस्तान की जेल से छूटकर आया है. बालाघाट जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों और मानवाधिकार आयोग की टीम की भी मदद ली गई. तब जाकर 31 जनवरी 2026 को पाक की जेलों से रिहा हुए 7 भारतीयों में प्रसन्नजीत की भी वतन वापसी हो सकी. इसके लिए परिजनों को पांच साल का इंतजार करना पडा. पाक जेल से रिहाई के बाद अटारी वाघा बॉर्डर से प्रसन्नजीत पंजाब के अमृतसर पहुंचा. वहां से उनकी बहन-जीजा उसे घर लेकर आए.
प्रसन्नजीत से पाक जेल में करवाते थे काम
वतन वापसी के बाद प्रसन्नजीत ने परिजनों को बताया कि उसके साथ पाकिस्तान की जेल मारपीट नहीं की गई. ना उसे यातनाएं दी गईं. सुबह, दोपहर व रात को खाना मिलता था. नाश्ते में चाय-रोटी व भोजन में दाल रोटी मिला करती थी. नाश्ते के बाद अन्य कैदियों के साथ जेल में उससे भी काम करवाया जाता था. पेडों के पत्ते एकत्रित करवाए जाते थे. जेल की साफ-सफाई करवाई जाती थी.
Balaghat Madhya Pradesh: इकलौते बेटे की याद में पिता चल बसे
1987 को जन्मे प्रसन्नजीत ने साल 2011 में जबलपुर के कॉलेज से बी फार्मा किया और फिर उसकी मानसिक स्थिति खराब ही होती चली गई. वह कभी भी घर से लापता हो जाता था. इकलौते बेटे की वापसी की आस में मां लक्ष्मी का भी मानसिक संतुलन बिगड गया और पिता लोपचंद की तो साल 2024 में मौत ही हो गई.
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