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सोना-चांदी नहीं सब्जी खरीदने सर्राफा बाजार जाते हैं लोग, नीमच में दिवाली के अगले दिन की अनोखी परंपरा

सर्राफा बाजार में वैसे तो आम दिनों में कोई अपनी दुकान के सामने किसी को बैठने नहीं देता लेकिन इस दिन सर्राफा व्यापारी भी हंसी-खुशी सब्जी व्यापारियों को अपनी दुकानों के आगे व्यवसाय करने की अनुमति देते हैं.

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सोना-चांदी नहीं सब्जी खरीदने सर्राफा बाजार जाते हैं लोग, नीमच में दिवाली के अगले दिन की अनोखी परंपरा
नीमच में दिवाली के अगले दिन की अनोखी परंपरा

Neemuch Diwali Rituals: दिवाली (Diwali) हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पर्व है. इस पर्व में लोग सोने-चांदी के आभूषण खरीदने के लिए बढ़-चढ़कर सर्राफा बाजार जाते हैं क्योंकि दिवाली पर आभूषण खरीदने का विशेष महत्व होता है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच (Neemuch) में भी दीपावली के दौरान एक दिन ऐसा भी आता है जब बड़ी संख्या में लोग सर्राफा बाजार जाते हैं. मगर इस दिन वे सर्राफे में आभूषणों की जगह सब्जियां खरीदने के लिए आते हैं. 

दरअसल नीमच में यह बरसों पुरानी एक अनोखी परंपरा है. यहां दीपावली के दूसरे दिन यानी गोवर्धन पूजा वाले दिन सर्राफा बाजार में सोना-चांदी नहीं बल्कि सब्जी मंडी सजती है. लोग यहां जेवर नहीं बल्कि सब्जियां खरीदने आते हैं. यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है और आज भी बदस्तूर जारी है. यहां एक दिन के लिए सभी सब्जी व्यापारी आते हैं और सोने-चांदी की दुकानों के बाहर सब्जी की दुकानें लगाते हैं. लोग भी यहां सब्जी खरीदने के लिए दूर-दूर से आते हैं.

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क्या है अनोखी परंपरा का इतिहास?

गोवर्धन पूजा की शाम को भगवान के लिए अन्नकूट बनाने के लिए सब्जी खरीदी जाती है. दरअसल पहले के समय नीमच का मुख्य बाजार सर्राफा में ही था. इस इलाके में कई मंदिर हैं. अन्नकूट की सब्जी बनाने के लिए लोगों को सब्जी खरीदने के लिए कहीं भटकना न पड़े इसलिए दुकानदारों ने उस जमाने में यह निर्णय लिया था कि अन्नकूट के प्रसाद के लिए लोगों को इसी बाजार में ही सब्जी मिल जाए. तभी से यह परंपरा चली आ रही है. 

बची हुई सब्जियां मंदिर में अर्पित कर देते हैं सब्जीवाले

हालांकि इस बार दीपावली के दूसरे दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण इस बार गोवर्धन पूजा का पर्व दो दिन छोड़कर मंगलवार को मनाया गया. इस कारण दीपावली के दो दिन बाद सब्जी मंडी सर्राफा बाजार में सजाई गई. विशेष बात यह है कि आज के दिन यहां तरह-तरह की सब्जियां आसानी से मिल जाती हैं. दुकानदारी खत्म होने के बाद जो सब्जियां बच जाती हैं, वे सब्जीवाले मंदिरों में अर्पित करके चले जाते हैं. 

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बिना मोलभाव किए सब्जियां खरीदते हैं ग्राहक

सर्राफा बाजार में वैसे तो आम दिनों में कोई अपनी दुकान के सामने किसी को बैठने नहीं देता लेकिन इस दिन सर्राफा व्यापारी भी हंसी-खुशी सब्जी व्यापारियों को अपनी दुकानों के आगे व्यवसाय करने की अनुमति देते हैं. इस दिन ग्राहक भी बिना मोलभाव किए ही सब्जियां खरीद कर ले जाते हैं. इससे उनका व्यवसाय भी काफी अच्छा होता है.

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