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PM Awas Yojana के तहत चुनाव से पहले आनन-फानन में दी गई चाबियां, अब तक लोगों को नहीं मिला घर का स्वामित्व

PM Awas Yojana: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छतरपुर में EWS कोटा को मिलने वाले आवास अभी तक नहीं मिले हैं. जबकि, लोकसभा चुनाव से पहले आनन-फानन में नगर पालिका ने 30 परिवारों को चाबियां सौंप दी थी.

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PM Awas Yojana के तहत चुनाव से पहले आनन-फानन में दी गई चाबियां, अब तक लोगों को नहीं मिला घर का स्वामित्व

PM Awas Yojana in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के छतरपुर (Chhatarpur) में प्रधानमंत्री अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम (Pradhan Mantri Affordable Housing Scheme) के तहत मल्टी स्टोरी बिल्डिंग प्रोजेक्ट का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है. यह काम साल 2016 में शुरू किया गया था. इस प्रोजेक्ट में 2.50 लाख रुपये और 3.50 लाख रुपये की लागत से ईडब्ल्यूएस कैटेगरी (EWS Category) के लिए 72 फ्लैट का निर्माण कराया गया है. खास बात यह है कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) से पहले एक कार्यक्रम आयोजित कर आनन-फानन में 30 घरों की चाबियां सौंपी गईं. लेकिन, निर्माण कार्य अधूरा होने और कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होने से लोगों को अभी तक कब्जा नहीं मिल सका है.

चार महीने पहले सौंपी थी चाबी

छतरपुर के गौरेया रोड पर बन रहे इन फ्लैट्स का निर्माण कार्य गुणवत्ता विहीन होने के भी आरोप लग रहे हैं. लोकसभा चुनाव के पहले नगर पालिका अधिकारियों ने एक कार्यक्रम आयोजित कर छतरपुर विधायक ललिता यादव और नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया की मौजूदगी में 30 लोगों को चाबियां सौंपी गईं. वहीं 40 लोगों के नाम फ्लैट्स की रजिस्ट्री भी हो गई है. इसके अलावा बाकी बचे फ्लैट्स की कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होने के चलते रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है. वहीं फ्लैट्स का निर्माण कार्य अधूरा होने और कागजी कार्रवाई न हो पाने के कारण लोगों को अभी तक मकानों पर कब्जा नहीं मिल सका है.

ऐसे में आवास योजना के पात्र और जरूरतमंद लोग अपने मकान में रहने के लिए कई वर्षों से इंतजार कर रहे हैं. अपने मकान में नहीं रहने के बावजूद लोग किस्त भी चुका रहे हैं. पीएम योजना अंतर्गत बनाए ईडब्ल्यूएस के 72 फ्लैट्स की बुकिंग तीन लॉटरी सिस्टम से की गई. इन फ्लैट्स के लिए कुछ लोगों का लोन बैंक से स्वीकृत हो गया, जिसके बाद अब उनके खाते से किस्त भी कट रही है. इन आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के बावजूद नगर पालिका ने लोगों को चाबी सौंपी है. जिसके बाद नगर पालिका पर सवाल उठने लगे हैं.

अलग-अलग फ्लैट की ये है कीमत

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 36.14 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी स्टोरी बिल्डिंग प्रोजेक्ट के तहत तीन प्रकार के फ्लैट बनाए गए हैं. इसमें 19 ब्लॉक का निर्माण कर 228 फ्लैट तैयार किए हैं. जिसमें से शासन की सब्सिडी मिलने के बाद 72 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स की कीमत मात्र ढाई लाख और साढ़े तीन लाख रुपये होने के चलते सभी फ्लैट्स की बुकिंग हो गई है. वहीं 60 एलआईजी 96 एमआईजी फ्लैट भी बनाए गए हैं, जिनकी कीमत क्रमशः 15 लाख रुपये और 20 लाख रुपये रखी गई है. इस प्रोजेक्ट के निर्माण में अभी तक 27 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका है.

मकानों की गुणवत्ता खराब

इस प्रोजेक्ट के तहत जिन लोगों को मकान एलॉट हुआ है, उनसे बात करने पर पता चला कि फ्लैट का निर्माण कार्य गुणवत्ता विहीन है. हितग्राही माया मिश्रा के पति सतीश मिश्रा ने बताया कि उनके साथ नगर पालिका ने एक प्रकार से धोखाधड़ी की है, जिसके चलते उनकी पत्नी के नाम पर सिर्फ 1 लाख 29 हजार रुपये का लोन ही स्वीकृत हो पाया. वहीं उनसे 50 हजार रुपये नकद में जमा कराए गए. जबकि नियमानुसार सिर्फ रसीद के पैसे ही लगना चाहिए था. वर्तमान में मिश्रा परिवार किराए के कमरे में रह रहा है, ऊपर से लोन की किस्त भी भर रहा है.

सतीश मिश्रा ने बताया कि ठेकेदार द्वारा मकानों में कराया गया कार्य गुणवत्ताहीन है. इसमें सुधार कराने के लिए नगर पालिका सीएमओ को लिखित में आवेदन दिया जा चुका है. जब तक फ्लैट के अंदर नियमानुसार कार्य नहीं कराया जाता. वह निवास नहीं करेंगे.

मकानों का स्वामित्व दिया जाना चाहिए : MLA

वहीं घर का स्वामित्व नहीं दिए जाने को लेकर जब हमने छतरपुर विधायक ललिता यादव से बात की तो उन्होंने कहा, 'हितग्राहियों को चाबियां सौंपने के बाद उन्हें मकानों का स्वामित्व दिया जाना चाहिए. इस मामले में नगर पालिका सीएमओ से बात कर मामले की जानकारी लेती हूं.' वहीं छतरपुर सीएमओ इस मामले को लेकर कहती हैं, 'ईडब्ल्यूएस के मकानों में दरवाजे और नल फिटिंग का कुछ कार्य शेष रह गया है. इस महीने के अंतिम सप्ताह तक हितग्राहियों को मकानों का स्वामित्व दे दिया जाएगा.'

एक परिवार ने रहना भी शुरू कर दिया

वहीं इन सब के बीच एक फ्लैट में राकेश खरे और उसका परिवार ने रहने लगा है, जबकि अभी इस कॉलोनी में कोई दूसरा परिवार रहने नहीं आया है. क्योंकि अभी तक नगर पालिका ने उन्हें मकानों के स्वामित्व लेटर नहीं दिए है. राकेश ने बताया कि वह किराए के मकान में रहते थे और प्रतिमाह 3 हजार रुपये किराया देते थे. इसके अलावा उन्हें ढाई हजार रुपये की फ्लैट की किस्त देनी पड़ती थी. राकेश खरे की आय कम होने से उन्हें परेशानी हो रही थी. ऐसे में उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों को सूचित करते हुए अपना निवास बिल्डिंग में बना लिया है.

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