
Heart Attack In Winters: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) रेलवे स्टेशन पर मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ठंड (Cold) के कारण पड़ने वाले हार्ट अटैक (Heart Attack) की वजह से एक महीने में चार लोगों की जान जा चुकी है. जिनमें से दो की मौत एम्बुलेंस न मिलने की वजह से हुई है. दरअसल, बीते दिन ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर दो लोगों की ठंड की वजह से तबियत खराब हो गई, जिसमें से एक यात्री की मौत गई, जबकि एक महिला यात्री को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया.
अज्ञात यात्री की मौत
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर एक व्यक्ति की अचानक मौत हो गई. कहा जा रहा है कि उसे ठंड की वजह से हार्ट अटैक आया था, लेकिन किसी को पता चलता इससे पहले ही उसकी मौत हो गई. काफी देर बाद अन्य यात्रियों ने इसकी सूचना जीआरपी को दी, जिसके बाद जीआरपी ने डॉक्टर को बुलाया, लेकिन उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया. फिलहाल मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी है.
वृद्ध महिला बेहोश होकर गिरी
इसके अलावा बांदा के लिए चम्बल एक्सप्रेस पकड़ने आई बुजुर्ग माया देवी को भी ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय स्टेशन पर ही सीने में हल्का दर्द हुआ और वो अचानक प्लेटफार्म नम्बर एक पर बेहोश होकर गिर पड़ीं. ये देख स्टेशन पर हडकंप मच गया. बीमार महिला मायादेवी के साथ उनका बेटा मनोज भी था. मनोज ने दौड़कर इसकी सूचना डिप्टी एसएस जनवेद मीणा को दी. उन्होंने एम्बुलेंस को इसकी जानकारी दी. जिसके बाद महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. मनोज के अनुसार, ठंड के कारण उन्हें अटैक आया था. फिलहाल हालत में सुधार है.
दो दिन पहले एम्बुलेंस के अभाव में गई युवक की जान
बता दें कि इससे दो दिन पहले स्टेशन पर आए हार्ट अटैक के चलते एक युवक की जान इसलिए चली गयी थी, क्योंकि एम्बुलेंस उपलब्ध न हो पाने के कारण उसे इलाज समय पर नहीं हो सका. दरअसल, अमन कपूर नामक 35 वर्षीय युवक अपनी मां के साथ ग्वालियर स्टेशन पहुंचे थे और झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस के थर्ड एसी कोच बी-8 में रतलाम जाने के लिए सवार हुए थे. कोच में बैठते ही बीनू को चक्कर आया और बेचैनी महसूस होने लगी. जब वो बेहोश होने लगा तो उनकी मां और कोच के अन्य यात्रियों ने इसकी सूचना रेलवे अधिकारियों को दी. जिसके बाद रेलवे अधिकारियों ने अमन और उनकी मां को ट्रेन से उतारा.
एम्बुलेंस के लिए 36 मिनिट में किये थे 6 कॉल
मौके पर मौजूद डिप्टी एसएस ए एस सोनकर ने एम्बुलेंस बुलाने के लिए 102 नंबर पर कॉल किया, लेकिन एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी. बता दें कि डिप्टी एसएस ए एस सोनकर ने करीबन 36 मिनट में छह बार कॉल किया, ताकि मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सके, लेकिन देर रात तक एम्बुलेंस नहीं आई. जिसके चलते युवक की जान चली गई.
उपचार में देरी के चलते हुई मौत
अमन कपूर के पिता राजकपूर का कहना है कि अमन के बेहोश होने के बाद उनकी पत्नी ने कॉल किया तो वो 20 - 25 मिनट में स्टेशन पर पहुंच गए. तब अमन स्ट्रेचर पर लेटा था. सब लोग सीपीआर दें रहे थे और एम्बुलेंस का इंतजार कर रहे थे. काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी जब एम्बुलेंस नहीं आई तो परिजनों ने उसे टैक्सी से लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए. मृतक के पिता ने कहा कि टैक्सी में उनकी सांसे चल रही थी, लेकिन जब वो ट्रॉमा सेंटर पहुंचा तो वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
रेलवे और स्वास्थ्य विभाग एक दूसरे के सिर फोड़ने पर आमादा
एक महीने में इलाज के अभाव में दो यात्रियों की मौत होने के बाद अब भी कोई भी विभाग व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की जगह इसका ठीकरा एक दूसरे के सिर फोड़ने पर आमादा है. ग्वालियर स्टेशन के डायरेक्टर एल आर सोलंकी का कहना है कि बीमार होने पर हम एम्बुलेंस और अपने डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस को कॉल करते हैं. हमारे डॉक्टर फर्स्ट एड देते हैं और एम्बुलेंस आने पर उससे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है.
सोलंकी यह भी कहते हैं कि रेल विभाग लगातार स्वास्थ्य अधिकारियों से कहता रहा है कि यहां एक एम्बुलेंस सदैव तैनात करें, लेकिन आश्वासन के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं करा सकी.
स्वास्थ्य विभाग का यह है जवाब
इधर, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर रेल विभाग पर ठीकरा फोड़ता दिख रहा है. डीएचओ डॉ प्रबल प्रताप सिंह का कहना है कि रेलवे केंद्र सरकार का उपक्रम है. उनके पास भी अपना स्वास्थ्य अमला होता है. अगर वो स्वास्थ्य विभाग को सूचना देते हैं तो हम भी तत्काल व्यवस्था करते हैं.
डॉ सिंह का आगे कहते हैं कि उन्होंने घटना के बाद एहतियात के तौर पर स्टेशन पर आपातकाल के लिए एक एम्बुलेंस तैनात करवा दी है. उनका कहना है कि अगर अतिरिक्त एम्बुलेंस की जरूरत होगी तो वो भी तैनात करेंगे. इसके बाद रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की बैठक भी हुई, जिसमें एक एम्बुलेंस स्टेशन पर लगातार खड़ी रखने का निर्णय लिया गया.
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