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This Article is From Apr 06, 2026

HC जज को कॉल करने का मामला: बीजेपी विधायक ने बिना शर्त मांगी माफी, फिर भी कोर्ट ने किया तलब

हाईकोर्ट जज को कॉल करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. अवैध खनन से जुड़े मामले में जज से संपर्क के आरोप पर कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है.

HC जज को कॉल करने का मामला: बीजेपी विधायक ने बिना शर्त मांगी माफी, फिर भी कोर्ट ने किया तलब

HC Judge Call Controversy: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक संवेदनशील मामले को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. अवैध खनन से जुड़े प्रकरण में हाईकोर्ट के एक जज को कॉल करने के आरोप में भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. विधायक ने सुनवाई के दौरान बिना शर्त माफी भी मांगी, इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उन्हें तलब करते हुए 21 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं. यह मामला न्यायिक निष्पक्षता और व्यवस्था की गरिमा से जुड़ा होने के कारण चर्चा में है.

आपत्तिजनक कॉल को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई

यह मामला जबलपुर में सामने आया, जहां अवैध खनन से जुड़े एक केस के दौरान हाईकोर्ट के जज को फोन लगाए जाने का आरोप लगा. इसी को लेकर हाईकोर्ट में आपराधिक अवमानना के तहत सुनवाई हुई. अदालत ने इसे गंभीर विषय मानते हुए विधायक संजय पाठक को नोटिस जारी किया.

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब करने के आदेश दिए. कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि संजय पाठक को 21 अप्रैल को हाईकोर्ट में स्वयं उपस्थित होना होगा.

गलती से लग गया था फोन- विधायक

सुनवाई के दौरान संजय पाठक की ओर से अदालत के सामने बिना शर्त माफी मांगी गई. विधायक का कहना था कि जज को कॉल लगना एक भूल थी और उनका कोई गलत इरादा नहीं था. उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताया. संजय पाठक ने अदालत में दलील दी कि हाईकोर्ट के जज विशाल मिश्रा को कॉल गलती से लग गया था. इस कॉल के पीछे किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप का उद्देश्य नहीं था. उनके पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के सामने अर्जी रखी.

भाजपा विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि पूरे मामले को संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए. उन्होंने माफी की अर्जी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की.

याचिका से शुरू हुआ पूरा मामला

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका से हुई थी. याचिका में आरोप लगाया गया कि एक लंबित मामले की सुनवाई के दौरान संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी.

जानकारी के मुताबिक, संजय पाठक परिवार से जुड़ा एक खदान से संबंधित मामला न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की अदालत में विचाराधीन था. इसी दौरान सितंबर 2025 में न्यायमूर्ति मिश्रा ने खुद यह बताया कि उनसे संपर्क साधने की कोशिश की गई है. इसके बाद न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने खुद को उस केस की सुनवाई से अलग कर लिया.

शिकायत के बावजूद नहीं हुई थी कार्रवाई

याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि इस मामले को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत की गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया.

अदालत ने आपत्ति की खारिज

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीय श्रोती ने पक्ष रखा. वहीं संजय पाठक की ओर से अदालत के आदेश पर आपत्ति जताई गई, लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने उन आपत्तियों को खारिज कर दिया.

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