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चुनावी बहस से नाराज होकर सगे मामाओं ने भांजे का कीचड़ में घोंटा था दम, अब ता उम्र भुगतेंगे ये सजा

Guna News: कोर्ट ने राजनीतिक विचारधारा के टकराव में अपने ही भांजे की बेरहमी से जान लेने वाले दो सगे मामाओं को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. महज 5 महीने के भीतर चले स्पीडी ट्रायल ने यह सिद्ध कर दिया कि अपराध कितना भी शातिराना क्यों न हो, कानून के हाथों से बच पाना नामुमकिन है.

चुनावी बहस से नाराज होकर सगे मामाओं ने भांजे का कीचड़ में घोंटा था दम, अब ता उम्र भुगतेंगे ये सजा
चुनावी बहस से नाराज होकर सगे मामाओं ने भांजे का कीचड़ में घोंटा था दम, अब ता उम्र भुगतेंगे ये सजा
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Madhya Pradesh:  प्रदेश के गुना (Guna) शहर के कैंट थाना क्षेत्र में पिछले वर्ष नवंबर में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में प्रधान जिला और सत्र न्यायालय (Session Court) ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने राजनीतिक विचारधारा के टकराव में अपने ही भांजे की बेरहमी से जान लेने वाले दो सगे मामाओं को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. महज 5 महीने के भीतर चले स्पीडी ट्रायल ने यह सिद्ध कर दिया कि अपराध कितना भी शातिराना क्यों न हो, कानून के हाथों से बच पाना नामुमकिन है.

तेजस्वी यादव पर बहस बनी जान की दुश्मन

घटना 16 नवंबर 2025 की रात की पुलिस लाइन परिसर की है, जहां पर बिहार के शिवहर जिले से आए तीन मजदूर राजेश मांझी, तूफानी और उनका भांजा शंकर (22) काम कर रहे थे. तीनों साथ बैठकर शराब पी रहे थे, तभी बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर चर्चा शुरू हुई. मृतक शंकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का कट्टर समर्थक था, जबकि उसके दोनों मामा जेडीयू के पक्षधर थे. बहस इतनी बढ़ी कि दोनों मामाओं ने मिलकर शंकर की बेरहमी से पिटाई कर दी. इसके बाद उसका मुंह पास ही भरे कीचड़ में तब तक दबाए रखा, जब तक कि उसकी सांसें नहीं थम गईं.

जब गवाह मुकरे, तो डीएनए ने दिलाई सजा

इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकांश गवाह अपने बयानों से पलट गए थे. ऐसे में कैंट पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना मील का पत्थर साबित हुई. तत्कालीन टीआई अनूप भार्गव और एसआई राहुल शर्मा की टीम ने मौके से जो साक्ष्य जुटाए थे, उनमें आरोपियों के नाखूनों में फंसी मृतक की चमड़ी सबसे अहम सबूत बनी. डीएनए रिपोर्ट में यह पुष्टि हो गई कि हत्या के वक्त आरोपियों और मृतक के बीच हाथापाई हुई थी. इसी तकनीकी साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दिया.

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प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र की अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 जनवरी से ट्रायल शुरू किया था. इसके बाद शनिवार, 18 अप्रैल को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों, तूफानी मांझी और राजेश मांझी को उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही दोनों पर एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया. यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है, जो राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत रंजिश में बदलकर हिंसा का सहारा लेते हैं.

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