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कोविड के दौरान वोट मांगने के मामले में प्रद्युम्न सिंह को कोर्ट से मिली बड़ी राहत, जानें पूरा मामला

कोरोना महामारी के दौरान हुए उप चुनाव के दौरान कोविड 19 गाइडलाइन का उल्लंघन करने के मामले में मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बड़ी राहत मिली है. जानें पूरा मामला

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कोविड के दौरान वोट मांगने के मामले में प्रद्युम्न सिंह को कोर्ट से मिली बड़ी राहत, जानें पूरा मामला
प्रद्युम्न सिंह तोमर को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
ग्वालियर:

कोरोना महामारी के दौरान हुए उप चुनाव में कोविड 19 गाइडलाइन (COVID-19 ) का उल्लंघन कर भीड़ के साथ वोट मांगने को लेकर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए केस मामले में मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar)  को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश की खात्मा रिपोर्ट (FR)  को मंजूर करते हुए इस केस को बंद करने के आदेश दिए हैं. 

क्या है पूरा मामला

ये मामला 4 अक्टूबर, 2020 का है. दरअसल साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने पार्टी को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके चलते कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई थी. इसके बाद जब उप चुनाव हुए तब कोरोनाकाल था और चुनाव प्रचार-प्रसार के लिए चुनाव आयोग खास गाइडलाइन जारी की गई थी. इस उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर चुनाव लड़ रहे थे.

वहीं चुनाव के प्रचार-प्रसार के दौरान ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर कोविड 19 गाइडलाइन का उल्लंघन करने के मामले में केस दर्ज किए गए थे. दरअसल, ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर  4 अक्टूबर, 2020 को ग्वालियर के श्रीकृष्ण नगर, कल्लू कुशवाह की बगिया,जती की लाइन,टॉवर वाली गली, राधा कॉलोनी, मेजर कॉलोनी, शिवाजी नगर, विजय नगर, राठौर चौक, सूर्य विहार आदि क्षेत्रों में पांच से अधिक लोगों के साथ जनसम्पर्क करके भाजपा के समर्थन में वोट मांगे थे, जबकि ऐसा करना प्रतिबंधित था.  

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कोविड गाइडलाइन उल्लंघन का हुआ था केस दर्ज

कोविड 19 गाइडलाइन (COVID-19 ) का उल्लंघन करने के मामले में पुलिस ने तोमर सिंह के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 269,188 और आपदा प्रबन्धन अधिनियम 2005 की धारा 51 (ख) के तहत केस दर्ज किया था और साल 2020 से  इस मामले को लेकर एमपी एमएलए कोर्ट में सुनवाई चल रही थी.

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पुलिस ने पेश की खात्मा रिपोर्ट

पुलिस ने इस मामले में सुनवाई के दौरान चालान पेश करने की जगह खात्मा रिपोर्ट (FR) रिपोर्ट पेश की. इस दौरान पुलिस ने कोर्ट को बताया कि दर्ज मामले के अनुसंधान के दौरान उसे ऐसे साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके कि मामले में चालान की कार्रवाई की जा सके. इसी के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति से मामले कोर्ट में यह एफ आर रिपोर्ट पेश की है. वहीं एमपी एमएलए कोर्ट ने विचार विमर्श के बाद पुलिस द्वारा पेश की गई एफआर रिपोर्ट को स्वीकार कर केस की सुनवाई बंद करने के आवेदन को भी मंजूरी दे दी. 

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