Controversy Over Voter List: मध्यप्रदेश में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को दस्तावेज सौंपे हैं.
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कुछ घरों में केवल 6 से 8 लोग रहते हैं, वहां मतदाता सूची में 30 से 40 नाम दर्ज हैं
सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, भोपाल के करोंद इलाके के वार्ड 75 स्थित रतन कॉलोनी में कई घरों के पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं. दिग्विजय सिंह का आरोप है कि कुछ घरों में जहां केवल 6 से 8 लोग रहते हैं, वहां मतदाता सूची में 30 से 40 नाम दर्ज हैं, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
आरोपों के समर्थन में संबंधित मकान मालिकों के शपथपत्र भी आयोग को सौंपे
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के रतन कॉलोनी के मकान नंबर 21 के मालिक हमीर सिंह यादव के अनुसार उनके घर में छह कमरे हैं और परिवार के केवल चार सदस्य ही मतदाता हैं, लेकिन मतदाता सूची में इस पते पर करीब 39-40 नाम दर्ज हैं. इसी तरह मकान नंबर 10 के मालिक कमलेश कुमार गुप्ता ने शपथपत्र में कहा कि उनके घर में करीब 8 वैध वोटर हैं, लेकिन वोटर लिस्ट में लगभग 36 नाम इस पते से जुड़े हुए हैं.
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई है
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य 100 प्रतिशत घर-घर जाकर सत्यापन करना था, उसमें गंभीर लापरवाही हुई है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने उनके घरों पर जाकर वास्तविक भौतिक सत्यापन ही नहीं किया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कथित फर्जी नाम सूची में जुड़ गए।
मामले की निष्पक्ष जांच, फर्जी नामों को हटाने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
दिग्विजय सिंह ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, फर्जी नामों को हटाने और लापरवाही या हेरफेर के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है और अगर ऐसी बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं तो किसी भी चुनावी प्रक्रिया से पहले उन्हें सुधारा जाना जरूरी है.
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शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए अधिकारी ने कहा कि जांच विधिक प्रक्रिया के तहत होगी
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी. उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से औपचारिक शिकायत दर्ज करनी होती है, जिसमें घोषणा व सत्यापन शामिल होता है. उन्होंने कहा कि निचले स्तर के अधिकारी जांच करते हैं और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी.
लंबे समय से मतदाता सूची में संदिग्ध नामों को लेकर शिकायत के बाद भी नहीं हटे कुछ नाम
शिकायतकर्ताओं में से एक कमलेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वह वर्ष 2007 से अपने घर में रह रहे हैं और लंबे समय से मतदाता सूची में संदिग्ध नामों को लेकर शिकायत कर रहे हैं. उनके मुताबिक पहले उनके पते पर करीब 70 फर्जी नाम दर्ज थे और SIR प्रक्रिया के बाद भी करीब 42 संदिग्ध नाम अब भी सूची में बने हुए हैं. वहीं, पोखन लाल साहू का आरोप है कि पहले उनके पते पर 65 फर्जी नाम जुड़े हुए थे और शिकायतों व शपथपत्र देने के बावजूद संशोधन के बाद भी 37 नाम अभी भी सूची में मौजूद हैं.
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उल्लेखनीय है अब इस पूरे मामले में नजर निर्वाचन आयोग की जांच पर टिकी है. अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल और गंभीर हो जाएगा कि आखिर कुछ घरों के पते पर दर्जनों मतदाताओं के नाम कैसे दर्ज हो गए.
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