Lok Adalat Success: दमोह जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपसी सुलह और समझदारी की एक सुखद तस्वीर सामने आई है. न्यायाधीश और अधिवक्ताओं की समझाइश के बाद एक ऐसा दंपति फिर से साथ रहने को राजी हो गया, जिनका रिश्ता 'लाडली बहना योजना' के पैसों के लेनदेन को लेकर टूटने की कगार पर पहुंच गया था. 10 साल की शादी में आई दरार के बाद अब वे साथ रहेंगे और जिंदी बिताएंगे.
दरअसल, दमोह निवासी सुनीता प्रजापति का विवाह करीब 10 साल पहले बारी गांव निवासी मुकेश प्रजापति से हुआ था. उनके दो बच्चे भी हैं. विवाद की शुरुआत तब हुई जब सुनीता ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर की फीस देने की बात कही. सुनीता को लाडली बहना योजना के पैसे मिलते थे, लेकिन जब उसने अपने कमाऊ पति से इलाज के लिए पैसे मांगे तो मुकेश ने इनकार कर दिया. इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और मुकेश ने सुनीता के साथ मारपीट की. इससे नाराज होकर सुनीता साल 2024 में अपने मायके आ गई और 2025 में न्यायालय में केस दर्ज करा दिया.
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न्यायाधीश और वकीलों ने समझाई परिवार की अहमियत
कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश मोहम्मद अजहर ने बताया कि यह विवाद एक बहुत ही छोटी सी बात से शुरू होकर न्यायालय तक पहुंचा था. लोक अदालत के दौरान अधिवक्ताओं और न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को परिवार की अहमियत समझाई. जिसके बाद वे एक बार फिर साथ रहेंगे को तैयार हो गए.
मुस्कुराते हुए घर लौटे पति-पत्नी
न्यायाधीश मोहम्मद अजहर ने बताया कि समझाइश के बाद सुनीता और मुकेश ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और पुरानी बातों को नजरअंदाज कर फिर से साथ रहने का फैसला किया. सुनीता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि परिवार को टूटने से बचाने के लिए छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना जरूरी है. इसके वे बच्चों के साथ मुस्कराते हुए घर चले गए.
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