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AIIMS Bhopal Chain Snatching: पुलिस ने गठित की जांच टीम, CCTV फुटेज की मदद से तलाशे जा रहे हैं सुराग

AIIMS Bhopal Chain Snatching: सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि वारदात के समय लिफ्ट क्षेत्र में एक भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था. पीड़िता ने तुरंत बागसेवनिया थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

AIIMS Bhopal Chain Snatching: पुलिस ने गठित की जांच टीम, CCTV फुटेज की मदद से तलाशे जा रहे हैं सुराग
AIIMS Bhopal Chain Snatching: पुलिस ने गठित की जांच टीम, CCTV फुटेज की मदद से तलाशे जा रहे हैं सुराग

AIIMS Bhopal Chain Snatching: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एम्स (AIIMS Bhopal) अस्पताल में महिला कर्मचारी से लिफ्ट के अंदर चेन स्नैचिंग (Chain Snatching) की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर दी हैं और एम्स परिसर व आसपास के इलाकों के सभी CCTV फुटेज की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच टीमें तेजी से काम कर रही हैं और आरोपी की पहचान के प्रयास जारी हैं. ये घटना सोमवार शाम की है.

क्या हुआ था?

स्त्री रोग विभाग में कार्यरत अटेंडेंट वर्षा सोनी ड्यूटी के दौरान ब्लड बैंक के पीछे स्थित एक लिफ्ट में अकेली थीं.
इसी दौरान मास्क पहने एक युवक लिफ्ट में घुसा और बातचीत के बहाने उनसे नेत्र रोग विभाग की मंजिल पूछने लगा.
जैसे ही लिफ्ट तीसरी मंजिल पर पहुंची, युवक बाहर निकलकर अचानक पलटा और महिला पर झपट पड़ा. उसने उनकी सोने की मोतियों वाली चेन और मंगलसूत्र छीनने की कोशिश की. विरोध करने पर आरोपी ने उन्हें धक्का दिया और सीढ़ियों की तरफ भाग निकला. युवक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गया, जबकि मोतियों की चेन टूटकर लिफ्ट में ही गिर गई.

घटना के वक्त सुरक्षा गार्ड भी नहीं था मौजूद

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि वारदात के समय लिफ्ट क्षेत्र में एक भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था. पीड़िता ने तुरंत बागसेवनिया थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

गणतंत्र दिवस की छुट्टियों का उठाया फायदा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी IPD गेट से फरार हुआ. रविवार और 26 जनवरी की छुट्टियों के चलते अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत ढीली थी, जिसका आरोपी ने फायदा उठाया. सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने चेहरा ढक रखा था, जिससे पहचान में मुश्किल आ रही है. सड़क से अस्पताल तक बढ़ते ऐसे मामलों के पीछे नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किए गए बदलावों का असर भी दिख रहा है. पहले चेन स्नैचिंग जैसे अपराध लूट/डकैती की श्रेणी में आते थे, जिसमें 10–14 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान था. लेकिन अब इन्हें “स्नैचिंग” की श्रेणी में रखा गया है, जिसकी अधिकतम सजा 3 साल है. गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है, जमानत आसान है और कई मामलों में आरोपी सिर्फ नोटिस पर छूट जाता है.

आंकड़ों में दिखा बढ़ोतरी का ट्रेंड

2024 में जहां सिर्फ 39 झपटमारी के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में 165 से अधिक स्नैचिंग केस सामने आ चुके हैं—यानी मामलों में करीब चार गुना बढ़ोतरी. पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि भोपाल में हर दूसरा स्ट्रीट क्राइम अब स्नैचिंग से जुड़ा हुआ है. पहले जहां लूट जैसे मामलों में गिरफ्तारी, कड़ी पूछताछ और अदालत की सख्ती होती थी, वहीं अब “गैर-गंभीर अपराध” माने जाने वाले स्नैचिंग में अपराधियों का डर खत्म होता दिख रहा है. कुछ दिनों पहले नीमच के एक पूर्व विधायक के बेटे को भी महंगे शौक पूरे करने के लिए चेन स्नैचिंग का सहारा लेने के आरोप में अहमदाबाद में गिरफ्तार किया गया था.

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