UGC New Rule Protest: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के एक प्रावधान पर विवाद खड़ा हो गया है. वहीं मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार (Inder Singh Parmar) कटनी (Katni) और खंडवा (Khandwa) के दौरे पर थे. जहां कटनी में उन्होंने उच्च शिक्षा क्षेत्र में चल रहे नवाचारों और योजनाओं की जानकारी दी, वहीं खंडवा में उनसे पूछे गए विवादित सवालों पर उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. रीवा राजकोट ट्रेन से खंडवा रेलवे स्टेशन पर उतरे मंत्री परमार ने वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी की.
विश्वविद्यालयों में लागू होगा डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम : परमार
कटनी में अल्प प्रवास के दौरान मंत्री परमार ने भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उच्च शिक्षा विभाग की तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इस वर्ष प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम लागू किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि अब तक परीक्षा कॉपियाँ बंडलों में ऑफलाइन जांच के लिए भेजी जाती थीं, लेकिन ऑनलाइन मूल्यांकन से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज़ और भरोसेमंद बनेगी.
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया लगातार जारी है. साथ ही उन्होंने प्रदेश में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और अध्ययन के लिए बड़े स्तर पर काम किए जाने की बात कही. इसके तहत तमिल, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, गुजराती सहित कई भाषाओं को राज्य के अलग–अलग विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाएगा. UGC के विरोध और शंकराचार्य मुद्दे पर पूछे गए सवालों पर मंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की और बात टालते हुए आगे बढ़ गए.
खंडवा में UGC विवाद और नई शिक्षा नीति पर सवालों से बचते नजर आए मंत्री
अपने दौरे के अगले चरण में मंत्री परमार सुबह रीवा–राजकोट ट्रेन से खंडवा पहुंचे, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया. यहां से वे सर्किट हाउस और फिर ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने नर्मदा नदी में स्नान किया और ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन किए. वे नर्मदा यात्रा समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए. खंडवा में जब मीडिया ने उनसे देशभर में उठ रहे UGC के विरोध, स्वर्ण समाज के आंदोलन, पदाधिकारियों के इस्तीफे और नई शिक्षा नीति से जुड़े सवाल पूछे तो मंत्री ने जवाब देने से साफ इनकार कर दिया और केवल इतना कहा कि “मैं ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान करने आया हूँ.” उनकी यह प्रतिक्रिया अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है.
क्यों हो रहा है यूजीसी के नए नियमों का विरोध?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के एक प्रावधान पर विवाद खड़ा हो गया है. देश के कई राज्यों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग यूजीसी ऑफिस के घेराव करने पहुंचे हैं. वहीं, यूपी के रायबरेली में लोगों द्वारा नेताओं को चूड़ियां भेजने की तैयारी हो रही है. इस नियम को लेकर कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए हैं. एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें यूजीसी के नए नियम के नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है. संसद के बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में है. इस बीच सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूजीसी नियमों को लेकर भ्रांति फैलाई जा रही है, जिस पर सरकार जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है.
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