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Ijtema 2024: इज्तिमा से उलेमा ने मुसलमानों के लिए जारी की बड़ी एडवायजरी, बोले- अब हर मुसलमान जरूर करें ये काम

Bhopal Ijtema 2024: तब्लीगी जमात का आलमी इज्तिमा 2024 के तीसरे दिन कई उलेमा ने अपनी तक़रीरों से समाज का मार्गदर्शन किया. इस दौरान खास तौर से लोगों से इस्लामी मूल्यों पर जीने और समाज में अमन व शांति बनाए रखने के साथ ही सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की अपील भी की गई.

Ijtema 2024: इज्तिमा से उलेमा ने मुसलमानों के लिए जारी की बड़ी एडवायजरी, बोले- अब हर मुसलमान जरूर करें ये काम

Bayan Bhopal Ijtema 2024: मध्य प्रदेश (Madhya Praesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में आलमी तबलीगी इज्तिमा (Aalmi Tablighi Ijtema Bhopal 2024: ) का आगाज हो चुका है. 77वें आलमी तबलीगी इज्तिमा के तीसरे दिन, सुबह से लेकर रात तक उलेमाओं की तकरीरों (प्रवचनों) का सिलसिला जारी है. इन तकरीरों में खास तौर से तब्लीगी जमात के लोगों और मुसलमानों से तालीम (शिक्षा), भाईचारा, सामाजिक समरसता और अल्लाह (ईश्वर) की इबादत और फरमा-बरदारी की ताकीद की गई. रविवार सुबह तक इस आयोजन में करीब 7 लाख लोग शामिल हुए, जिसमें देशभर की जमातों के अलावा 24 विदेशी देशों के मेहमान भी मौजूद रहे. सोमवार सुबह होने वाली दुआ ए खास में करीब 12 लाख लोगों के शिरकत की उम्मीद है.

आलमी तबलीगी इज्तिमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह इंसानी जिंदगी को बेहतर बनाने, समाज में भाईचारा कायम करने और हर किसी को दीन के प्रति जागरूक करने का एक माध्यम है. इसमें दुनियाभर से आए मुसलमान अपने अनुभव साझा करते हैं, जिससे उन्हें इस्लामी शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का मौका मिलता है.

दीन और सामाजिक समरसता की अपील

इज्तिमा में उलेमा ने इस्लामी शिक्षा और समाज सुधार का संदेश दिया. मौलाना जमशेद साहब ने ईमान की ताकत, इस्लामी अदब और दीन के प्रचार-प्रसार की अहमियत पर जोर दिया. मौलाना सईद साहब ने मुसलमानों से सामाजिक सुधार और इस्लामी अखलाक को अपनाने की अपील की. मौलाना सआद साहब कांधलवी ने सामाजिक समरसता और इस्लामी एकता को मजबूत करने पर जोर दिया. उनका कहना था कि मुसलमानों को अपनी खामियों को दूर कर आपसी इत्तेहाद (एकता) को बढ़ावा देना चाहिए.

खिदमत करने वालों की प्रेरणादायक कहानियां

इज्तिमा आयोजन के दौरान भोपाल के लोग मेहमानों की सेवा में जुटे नजर आए. 93 वर्षीय मोहम्मद शम्मू, जिन्होंने इज्तिमा की शुरुआत से लेकर आज तक खिदमत की है. वहीं, 77 वर्षीय मोहम्मद अख्तर पिछले 50 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन सेवाओं का उद्देश्य मेहमानों की सुविधा और उनकी इबादत में कोई खलल न पड़ने देना है.

तबलीग बना जिंदगी में बदलाव का जरिया

इस आयोजन में कई ऐसे लोग भी पहुंचे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत के लिए समर्पित कर दी है. 90 वर्षीय शमसुद्दीन ने 55 वर्षों से जमातों का हिस्सा बनकर अपनी जिंदगी गुजारी. हाजी अनवर उल्लाह खान, जो मेडिकल विभाग से रिटायर होकर तबलीगी कामों में लगे हैं. वहीं, 8 वर्षीय मेहरान, जिन्होंने पहली बार तीन दिन की जमात के साथ इज्तिमा का अनुभव किया.

समापन पर होगी दुआ ए खास 

सोमवार सुबह दुआ ए खास के साथ इज्तिमा का समापन होगा. दुआ का समय सुबह 9 बजे निर्धारित किया गया है. इसके बाद करीब 2 हजार जमातें देशभर में निकलेंगी, जो इस्लामी शिक्षा का संदेश लेकर अपने-अपने इलाकों में जाएंगी.

आयोजन की खास बातें

इज्तिमा में शामिल विदेशी जमातों को द्विभाषी और सांकेतिक भाषा के जरिए तकरीरों का सार समझाया जा रहा है. भोपाल टॉकीज से इज्तिमागाह तक यातायात नियंत्रण के लिए वालंटियर्स ने अपने शिफ्ट्स का प्रबंधन किया. आयोजन से सियासी गतिविधियां पूरी तरह दूर रखी गईं, जिससे इसे एक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के रूप में देखा गया. 

इज्तिमा के बाद होगी व्यापारिक मेले की शुरुआत

समापन के बाद ताजुल मस्जिद परिसर में गर्म कपड़ों और सस्ते सामानों का एक बड़ा व्यापारिक मेला लगेगा. यह मेला सोमवार शाम से शुरू होकर करीब दो महीने तक चलेगा. यह बाजार "रस्ते का माल सस्ते में" की तर्ज पर जाना जाता है और हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं.

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