BPL Ration Cards Scam: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीपीएल राशन कार्ड को लेकर एक बड़े और सनसनीखेज फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस घोटाले को अंजाम देने वाले कोई बाहरी लोग नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी ही निकले. आरोप है कि एसडीएम कार्यालय की आधिकारिक आईडी और पासवर्ड का अवैध उपयोग कर उन परिवारों के बीपीएल कार्ड बना दिए गए, जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं. आलीशान मकान, गाड़ियां और 40 से 50 हजार रुपये तक मासिक आय वाले लोगों को अति गरीब दर्शा दिया गया. खुलासे के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई फर्जी कार्ड निरस्त किए और आरोपियों को निलंबित कर दिया. भोपाल से NDTV के लिए हरप्रीत कौर की रिपोर्ट.
आलीशान जीवन, फिर भी बीपीएल कार्ड
जांच में सामने आया कि भोपाल में कई ऐसे परिवारों के नाम बीपीएल राशन कार्ड सूची में दर्ज थे, जिनके पास पक्के और आलीशान घर हैं. घर के पोर्च में कारें खड़ी थीं और नियमित तौर पर अच्छी‑खासी आय हो रही थी. इसके बावजूद इन्हें गरीब घोषित कर सस्ते अनाज और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा था. यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन हालिया जांच में इसकी परतें खुलनी शुरू हुईं.

BPL Ration Cards Scam: भोपाल फर्जी बीपीएल कार्ड
सुनियोजित साजिश का खुलासा
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि मामला किसी तकनीकी गलती या लापरवाही का नहीं, बल्कि एक सोची‑समझी साजिश का है. वन विभाग के वन रक्षक किशोर मेहरा, जिसके पास कार्यालय की महत्वपूर्ण आईडी और पासवर्ड थे, ने इस सिस्टम का दुरुपयोग किया. आरोप है कि उसने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री सुरेश बैरागी और कंप्यूटर ऑपरेटर गोविंद माली के साथ मिलकर अपात्र लोगों के बीपीएल कार्ड बनवाए.
कलेक्ट्रेट कर्मियों के परिजन भी लाभार्थी
जांच में यह भी सामने आया कि केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट में कार्यरत बाबुओं के परिजनों के नाम पर भी बीपीएल राशन कार्ड बनाए गए. इससे यह अंदेशा और गहरा हो गया कि फर्जीवाड़ा काफी व्यापक और संगठित स्तर पर किया गया है. इन कार्डों के जरिए गरीबों के हिस्से का राशन और अन्य सुविधाएं संपन्न लोगों तक पहुंचाई जा रही थीं.
डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि एसडीएम कार्यालय से ही डिजिटल सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे लग गई. आखिरकार, महत्वपूर्ण आईडी और पासवर्ड आरोपियों तक कैसे पहुंचे और लंबे समय तक इसका गलत इस्तेमाल कैसे होता रहा. यह खुलासा सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
एसडीएम को नोटिस, जांच का दायरा बढ़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर ने एमपी नगर क्षेत्र के एसडीएम को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही भोपाल के सभी एसडीएम से पिछले एक साल में बने बीपीएल राशन कार्डों का रिकॉर्ड तलब किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच अब केवल एमपी नगर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे भोपाल जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान जारी किए गए बीपीएल कार्डों की दोबारा स्क्रूटनी की जाएगी.
जल्द सामने आ सकते हैं और बड़े नाम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड की गहन जांच के दौरान कई और बड़े नाम सामने आने की आशंका है. जिला प्रशासन का दावा है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घोटाले ने न केवल सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि राशन वितरण प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार और कड़ी निगरानी की जरूरत है.
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