मध्य प्रदेश के भिंड जिले की रौन और मिहोना तहसील के लगभग आधा सैकड़ा गांवों में तेज बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर तबाही मचा दी. इससे पहले से बर्बादी झेल रहे किसानों की बची हुई उम्मीदें भी अब खत्म होती नजर आ रही हैं.
दरअसल, बीती रात हुई तेज बारिश ने खेतों का मंजर बदल दिया. इससे किसान परेशान थे. इसके बाद बुधवार 8 मार्च को एक बार फिर तेज बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई. इससे किसान पूरी तरह बर्बाद हो गए. जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक सुनहरी गेहूं की फसल लहलहा रही थी, वे अब पानी से लबालब भरे हुए हैं. कई किसानों ने गेहूं की कटाई कर फसल खेतों में रखी थी, जो पानी में डूबकर सड़ने लगी है.
पहली बारिश में भी मची थी तबाही
बता दें कि इससे पहले 4 अप्रैल को आए तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने जिले में भारी तबाही मचाई थी. उस दिन आई प्राकृतिक आपदा में दीवार गिरने से 12 साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी, जबकि पेड़ गिरने से एक किसान ने भी अपनी जान गंवा दी थी. करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए थे और 40 से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे. तेज आंधी के चलते रौन और मिहोना तहसील में बिजली के खंभे तक उखड़ गए थे, जिससे कई गांवों में अंधेरा छा गया था.
सर्वे शुरू नहीं होने से किसानों में नाराजगी
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पहली बारिश में 60 हजार हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी थी. अब दूसरी बार हुई बारिश और ओलावृष्टि ने नुकसान को और गहरा कर दिया है. लहार, मिहोना, मछंड, रौन, गोहद, मौ और मेहगांव क्षेत्र इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. जहां के किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी और इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी. लेकिन पूरी उम्मीदों में पानी फिर गया. कई किसानों ने बताया कि उनकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, उनके पास अगली खेती के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं. किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने नुकसान का सही आकलन करने के लिए सर्वे कार्य शुरू नहीं किया गया है.