Ujjain Saraswati Mata Temple: मध्य प्रदेश के उज्जैन में कई पौराणिक मंदिर और अनोखी परंपरा है. इन्हीं में एक है बसंत पंचमी पर 400 साल पुराने सरस्वती माता के मंदिर में इंक और कलम चढ़ाने की. इसी परंपरा के चलते शुक्रवार को सरस्वती मंदिर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंचे और ज्ञान अर्जित का आशीर्वाद लिया.
दरअसल, सिंहपुरी क्षेत्र में सरस्वती माता का करीब 400 वर्ष पुराना मंदिर है. मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का स्याही से अभिषेक कर कलम अर्पित करने से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और परीक्षा में सफलता मिलती है. यही वजह है कि शुक्रवार को स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा बड़ी संख्या में यहां पहुंचे और मां सरस्वती को इंक से अभिषेक किया. इसके बाद पीले फूल और कलम अर्पित की.
कैसे शुरू हुई परंपरा?
मंदिर के पुजारी विजय त्रिवेदी ने बताया कि यह परंपरा कैसे शुरू हुई... इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है, लेकिन पिछले 50 साल से बसंत पंचमी पर बड़ी संख्या में छात्र, छात्राएं सफलता की कामना के लिए आते हैं. परीक्षा में पास होने के बाद भी बच्चे माता को स्याही चढ़ाकर धन्यवाद देने भी आते हैं. यही वजह है कि स्टेशनरी पर इस दिन के लिए दुकानदार स्याही भी मंगवा कर रखते हैं.
आस्था का केंद्र है प्रतिमा
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर बाबा की नगरी में स्थित सरस्वती मां का यह मंदिर आज शिक्षा, आस्था और विश्वास का एक अनूठा प्रतीक बन चुका है, जहां हर बसंत पंचमी को हजारों विद्यार्थियों की उम्मीदें मां शारदे के चरणों में समर्पित होती हैं. यहां मां की काले पाषाण से निर्मित दुर्लभ प्रतिमा विराजमान है. छोटे से मंदिर में स्थापित यह मूर्ति भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है.
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