Hospital Negligence India: आगर-मालवा में अस्पताल का मेडिकल वेस्ट खुले में फेंक दिया गया. जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर ट्रेंचिंग ग्राउंड और नेशनल हाईवे किनारे दवाईयों, इंजेक्शन और बोतलों के ढेर देखकर लोगों में हड़कंप मच गया. यह लापरवाही न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि आमजन और पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है.
कचरे के ढेर से मचा हड़कंप
सोमवार सुबह ट्रेंचिंग ग्राउंड में मेडिकल वेस्ट के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दिए. इतना ही नहीं, यह कचरा नेशनल हाईवे किनारे भी कई जगह बिखरा हुआ था. जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल, सीएमएचओ कार्यालय और नगर पालिका में अफरा-तफरी मच गई. शाम तक यह कचरा वहीं पड़ा रहा और किसी भी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की.
जांच से पहले सफाई का खेल
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को अस्पताल में जांच दल आने वाला था. अस्पताल प्रबंधन ने स्वच्छ छवि दिखाने के लिए रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात में पांच ट्रॉली कचरा आनन-फानन में उज्जैन रोड स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में फेंक दिया. रास्तेभर यह कचरा बिखरता गया, लेकिन कर्मचारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया.
विधायक निवास के पास कचरे का ढेर
हद तो तब हो गई जब सोमवार सुबह स्थानीय विधायक मधु गेहलोत के निवास के पास मेडिकल वेस्ट का बड़ा ढेर मिला. इसमें इस्तेमाल की गई दवाइयां, इंजेक्शन, बोतलें और अन्य अवशेष थे. बाद में जेसीबी से हटाकर यह कचरा फिर ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाल दिया गया.
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गाइडलाइन की खुली धज्जियां
सरकारी नियमों के अनुसार, अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निपटान तय गाइडलाइन के तहत होना चाहिए. इसके लिए अलग वाहन की सुविधा भी है. बावजूद इसके, यह लापरवाही सामने आई, जो गंभीर खतरे का संकेत है. इससे आमजन और पशु-पक्षियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है.
अंदरखाने की हलचल
खबर है कि स्वास्थ्य विभाग अब इस मेडिकल वेस्ट को रातोंरात ट्रेंचिंग ग्राउंड से हटाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर न तो मेडिकल वेस्ट की पुष्टि हुई है और न ही किसी से जवाब-तलब किया गया है. यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है.
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