Medical Certificate Fraud India: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आए अनोखे मामला न सबको हैरान कर दिया. यहां एक ऐसे व्यक्ति का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया, जिसकी पहले ही मौत हो चुकी थी. हैरानी की बात यह है कि यह सर्टिफिकेट किसी छोटे कर्मचारी ने नहीं, बल्कि खुद अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर के नाम से जारी हुआ. अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का विषय बन गया है.
यह चौंकाने वाला मामला दुर्ग जिले के सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय से सामने आया है. जानकारी के अनुसार 21 अप्रैल 2024 को शख्स की मौत हो गई थी. इसके एक साल बाद 2025 में मृत व्यक्ति का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया. यह वही अस्पताल है, जहां से आम लोगों को इलाज और जरूरी मेडिकल प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं.
मृत व्यक्ति के नाम पर जारी हुआ सर्टिफिकेट
जिस व्यक्ति के नाम पर यह मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया गया, उसका नाम गणेश राम बताया गया है. जांच में सामने आया कि गणेश राम की पहले ही मौत हो चुकी थी. नियमों के अनुसार, किसी मृत व्यक्ति के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाया जाता है. इसके बावजूद मृत व्यक्ति को “बीमार” बताकर उसे आराम की सलाह दे दी गई.
डॉक्टर के हस्ताक्षर से जारी हुआ प्रमाण-पत्र
सबसे गंभीर बात यह है कि यह सर्टिफिकेट किसी सामान्य कर्मचारी ने नहीं, बल्कि अस्पताल के प्रभारी एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रियम सिंह द्वारा जारी किया गया बताया जा रहा है. सर्टिफिकेट पर डॉक्टर के हस्ताक्षर और सरकारी मुहर भी मौजूद है, जिससे मामला और ज्यादा संदिग्ध हो गया है.
जांच में खुली पोल
जब यह मामला सामने आया, तो एनडीटीवी की टीम ने दिए गए पते पर जाकर जांच की. वहां पता चला कि गणेश राम की पहले ही मृत्यु हो चुकी है. इसके बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया. सवाल उठने लगे कि आखिर मृत व्यक्ति की जांच कब और कैसे की गई, और यह सर्टिफिकेट किन परिस्थितियों में जारी हुआ.
CMHO ने मामले को बताया गंभीर
दुर्ग जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज दानी ने इस मामले को गंभीर बताया है. उन्होंने साफ कहा कि मृत व्यक्ति का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनाना नियमों के खिलाफ है. मृत व्यक्ति के लिए केवल मृत्यु प्रमाण-पत्र ही जारी किया जा सकता है. मामला संज्ञान में आते ही अस्पताल प्रभारी को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं.
CMHO डॉ. मनोज दानी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे किसी तरह की गंभीर अनियमितता या साजिश छिपी है.
मेडिकल सर्टिफिकेट में क्या-क्या लिखा है?
जारी किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट में कई चौंकाने वाली जानकारियां दर्ज हैं. यह सर्टिफिकेट “मेडिकल सर्टिफिकेट फॉर गवर्नमेंट सर्वेंट्स” की श्रेणी में आता है, जो सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी या छुट्टी बढ़ाने के लिए बनाया जाता है.
सर्टिफिकेट में मरीज का नाम श्री गणेशराम, उम्र 62 वर्ष और पद नगर निगम सुपेला दर्ज है. बीमारी के कॉलम में दाहिने पैर में सूजन लिखी गई है. डॉक्टर ने मरीज को 10 दिनों के आराम की सलाह दी है, जो 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी बताई गई है. सर्टिफिकेट पर ओपीडी नंबर, जारी करने की तारीख और सीनियर मेडिकल ऑफिसर की मुहर भी लगी हुई है.