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Basant Panchami 2024: बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के अलावा की जाती है इनकी भी पूजा, जानें-क्या है महत्व

Vasant Panchami Special: बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की भी पूजा करते हैं. पहले के समय में राजा हाथी पर बैठकर नगर भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र है इसीलिए कामदेव का धनुष फूलों से बनाया हुआ है.

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Basant Panchami 2024: बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के अलावा की जाती है इनकी भी पूजा, जानें-क्या है महत्व

Basant Panchami:  मकर संक्रांति के बाद हर किसी को बसंत पंचमी के त्योहार का इंतजार रहता है. बसंत पंचमी के साथ सर्दी का मौसम की भी रुख्सती शुरू हो जाती है. वसंत ऋतु (Vasant maah) के आगमन और फसल की शुरुआत होने के बाद यह त्यौहार बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस दिन मां सरस्वती (Goddess Saraswati) ही नहीं, बल्कि इस दिन कामदेव (Kamdev) की पूजा भी की जाती है.

सेहत की दृष्टि से शुभ होती है ये ऋतु 
यह ऋतु सेहत की दृष्टि से भी बहुत अच्छी मानी जाती है. इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों में भी नई ऊर्जा देखने को मिलती है. बसंत को प्रेम के देवता कामदेव का मित्र माना जाता है. इस ऋतु को बहुत शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन नदियों में स्नान करने से बहुत लाभ होता है.

कामदेव की भी करते हैं पूजा 
बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की भी पूजा करते हैं. पहले के समय में राजा हाथी पर बैठकर नगर भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र है. इसलिए कामदेव का धनुष-फूलों से बनाया जाता है. जब कामदेव का बान छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इसलिए इस दिन फूलों को प्रेम और प्रकृति से जोड़कर भी देखते हैं और इस दिन रति की भी पूजा की जाती है.

पीली मिठाई का लगाते हैं भोग
इस मौक़े पर देवी को पीले फूल और पीली मिठाई का भोग लगाया जाता है. वही बड़ों का कहना है कि इस दिन पीले रंग ही पहनना चाहिए. आमतौर पर लोगों के घरों में केसर हलवा और मीठे चावल बनाए जाते हैं. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना तो शुभ माना ही जाता है और पीले रंग का पूजन भी किया जाता है. वहीं, कई क्षेत्रों में देश में इस दिन खिचड़ी भी बनाई जाती है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.

पीले रंग के कपड़े 
इस दिन पीले रंग के कपड़े पहने जाते हैं, क्योंकि यह रंग माता सरस्वती को बेहद प्रिय है. बसंत ऋतु को सभी मौसमों में बड़ा माना जाता है. इस मौसम में न तो चिलचिलाती धूप होती है, ना ही सर्दी और नहीं बारिश. बसंत में पेड़ पौधे ताज़े फूल खिलते हैं और चारों तरफ प्रकृति का सुंदर नजारा देखने को मिलता है.

Disclaimer: यहां पर बताई गई बातें आम जानकारियों पर आधारित है. यह किसी भी तरह से योग्य राय का विकल्प नहीं है. ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा किसी संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करें. NDTV इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

यह भी पढ़ें: Basant Panchami 2024: बसंत पंचमी के दिन ऐसे करें माता सरस्वती की पूजा-अर्चना, पंडित से जानिए शुभ मुहूर्त

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