Kailash Kher With NDTV: प्रसिद्ध सूफी और आध्यात्मिक गायक कैलाश खेर (Kailash Kher) ने भोपाल में खेलो एम.पी यूथ गेम्स (Khelo M.P Youth Games) उत्सव के उद्घाटन अवसर पर NDTV से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने न सिर्फ आज डीटी नगर स्टेडियम में होने वाले अपने कार्यक्रम को लेकर बात की, बल्कि युवाओं, खेल, मानसिक स्वास्थ्य, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता पर भी अपने विचार खुलकर रखे.
तनाव कम करने के लिए
बातचीत में जब कैलाश खेर से पूछा गया कि आज के कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति कैसी रहने वाली है और इसकी क्या तैयारी है? उन्होंने कहा कि आज का पूरा कार्यक्रम युवाओं को समर्पित है. मध्य प्रदेश में आयोजित हो रहे एमपी खेलो उत्सव के लिए वह विशेष रूप से भोपाल पहुंचे हैं. उनका कहना था कि खेल युवाओं को न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी काफी हद तक कम करता है.
कैलाश खेर ने कहा कि जरूरी नहीं है कि तनाव कम करने के लिए सिर्फ संगीत ही हो. जैसे संगीत सुनने से मन को शांति मिलती है, वैसे ही खेल खेलने से भी मानसिक दबाव कम होता है. आज के दौर में जब युवा एंजायटी, डिप्रेशन और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब खेल एक बहुत बड़ा समाधान बन सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि खेल और संगीत दोनों ही इंसान को प्रकृति से जोड़ते हैं. एमपी खेलो उत्सव के उद्घाटन को लेकर कैलाश खेर ने युवा एवं खेल मंत्री विश्वास सारंग को बधाइयां दीं. इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के सभी मंत्रियों और अधिकारियों को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भी उन्होंने खुलकर सराहना की और कहा कि आज खेलों को जिस गंभीरता से लिया जा रहा है, वह देश के बदलते भारत की पहचान है. उनका कहना था कि मेरा भारत बदल रहा है और खेलों को अब वह महत्व मिल रहा है, जिसके वह हकदार हैं. बातचीत के दौरान कैलाश खेर ने खुद को सिर्फ फिल्मों का गायक मानने से इनकार करते हुए कहा कि वह एक आध्यात्मिक गायक और गीतकार हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें भारतीय संगीत और उसकी जड़ों को ज्यादा महत्व देना चाहिए.
मानसिक शांति का राज
जब उनसे उनकी फिटनेस और मानसिक शांति का राज पूछा गया, उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनकी आध्यात्मिकता ही उनकी ताकत है. उन्होंने कहा कि जहां अच्छा भोजन और भजन होता है, वहां शरीर और मन कभी खराब नहीं होते. साथ ही उन्होंने लालच, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने की सलाह दी. कैलाश खेर ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज हम अपने सनातन धर्म और धरती से दूर होते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है. उनका मानना है कि जो प्रकृति से कटता है, वह विकृति की ओर बढ़ता है. मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने युवाओं से अनुशासित दिनचर्या अपनाने और खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की.
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