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प्यास पर संकट की आहट, यहां तीन ब्लॉक आए सेमी क्रिटिकल जोन में, अब सजग रहें...

Falling Groundwater Level :  जल ही जीवन है. मनाव शरीर में तीन चौथाई हिस्से में जल है. लेकिन अब भूजल गिरता जा रहा है. गिरता भूजल प्यास पर संकट की आहट है. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में तीन ब्लॉक सेमी क्रिटिकल जोन में आ गए . इसलिए पानी की बूंद-बूंद को सहेजना जरूरी है. ये काम तुरंत शुरू कर दीजिए.

प्यास पर संकट की आहट, यहां तीन ब्लॉक आए सेमी क्रिटिकल जोन में, अब सजग रहें...

Water Crisis : भूजल का नीचे गिरना बड़ी चुनौती है. ये प्यास पर संकट की आहट है... यदि समय रहते हुए जल दोहन को रोकने का काम नहीं किया गया, तो परेशानी और भी भयानक हो सकती है. जल संरक्षण के लिए बड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है. राजनांदगांव का बुरा हाल है. यहां गर्मी का अहसास होने लगा है... इसके साथ ही जल संकट की खबरें भी आने लगी हैं. राजनांदगांव में गिरते भूजल पर अपडेट आया है. तीन ब्लॉक सेमी क्रिटिकल जोन में आ गए हैं,जिसमें राजनांदगांव,डोंगरगढ़ और डोंगरगांव शामिल हैं.

भूजल स्तर लगभग 350 फीट नीचे जा रहा है,जिसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. इसके साथ ही लगभग 200 हैंडपंप के सूखने की बात भी सामने आ रही है, जिसके कारण जल संकट और गहरा गया.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले को 20 मार्च से 30 जून तक जल अभावग्रस्त घोषित किया गया. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के कोई भी नए नलकूप नहीं होगा. पेयजल के अलावा किसी अन्य प्रकार के प्रयोजन के लिए खनन की अनुमति नहीं दी.

राजनांदगांव, डोंगरगढ़ और डोंगरगांव शामिल 

भूजल स्तर नीचे होने के कारण कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. राजनांदगांव जिले के तीन ब्लॉक सेमीक्रिटिकल जोन में हैं, जिसमें राजनांदगांव,डोंगरगढ़ और डोंगरगांव शामिल हैं. इसके साथ ही लगभग 200 हैंड पंप सूखने की कगार पर हैं. 350 फीट नीचे लगभग भूजल स्तर गिर चुका है. इसके कारण पेयजल संकट भी गहरा गया.

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'भूजल रिचार्जिंग बहुत कम कर पा रहे'

वहीं, इसको लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि लगातार पानी की समस्या दिनों दिन बन रही है. सेंट्रल ग्राउंड वाटर टीम ने यहां सर्वे किया है जहां तीन ब्लाक सेमी क्रिटिकल जोन में रखा गया. चौथा ब्लॉक भी अगर इसी तरीके से दोहन हुआ तो वह भी सेमी क्रिटिकल जोन में आ जाएगा, जितना हम भूजल निकल रहे हैं. उसका रिचार्जिंग बहुत कम कर पा रहे हैं. लगातार बोर ट्यूबवेल के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है. जिसके कारण यह समस्या बनी हुई है. जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा गांव में पंप के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है, और लोगों को जल का कम उपयोग करने के साथ ही इसकी बर्बादी को रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है. 

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