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Water Crisis: मनेंद्रगढ़ को 40 साल तक पेयजल राहत देने वाली योजना पर रोक, 115 करोड़ रुपये की जल परियोजना पर आया ये संकट

Water Problem in Chhattisgarh: मनेंद्रगढ़ की केवई नदी को हसदेव नदी से जोड़ने वाली 115 करोड़ रुपये की जल परियोजना पर रोक लगा दी गई है. इस फाइल को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है. बता दें कि इस लिंक परियोजना के पूरा होने के बाद मनेंद्रगढ़ को अगले 40 साल तक पेयजल का संकट नहीं होगा. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

Water Crisis: मनेंद्रगढ़ को 40 साल तक पेयजल राहत देने वाली योजना पर रोक, 115 करोड़ रुपये की जल परियोजना पर आया ये संकट
मनेंद्रगढ़ की नदी जोड़ो योजना का काम टला

River Link project in Manendragarh: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के एमसीबी जिले के मनेंद्रगढ़ से निकलकर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बहने वाली केवई नदी (Kewai River) को नहर बनाकर हसदेव नदी (Hasdev River) से जोड़ने की 115 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बहुउद्देशीय जल परियोजना (Water Project) में तकनीकी आपत्ति लगाकर फाइल लौटा दी गई है. अब इस तकनीकी कमी को दूर कर नए सिरे से प्रोजेक्ट फाइल बनाने की तैयारी की जा रही है. इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर मनेंद्रगढ़ सहित चार नगर पंचायतों को अगले 40 वर्षों तक भरपूर पेयजल की आपूर्ति होगी, वहीं कोरबा स्थित बांगो परियोजना को भी पानी मिलने की संभावना है. 

क्या है केवई नदी लिंक परियोजना?

छत्तीसगढ़ के अविभाजित कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम बैरागी की पहाड़ियों से केवई नदी निकलती है, जो मध्य प्रदेश की ओर बहती है. यह क्षेत्र सघन वन और पहाड़ी जल ग्रहण क्षेत्र होने के कारण बारहमासी जल प्रवाह वाला है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस नदी के जल का अब तक कोई उपयोग नहीं हुआ है. इसी को ध्यान में रखते हुए केवई एवं हसदेव नदी को जोड़ने की योजना बनाई गई है. केवई नदी छत्तीसगढ़ में लगभग 39 किलोमीटर बहती है, जिसका जल ग्रहण क्षेत्र 459.34 वर्ग किलोमीटर है.

प्रस्तावित जल परियोजना स्थल पर इस नदी की लंबाई 21 किलोमीटर है और इसका जल ग्रहण क्षेत्र 147.25 वर्ग किलोमीटर है. नदी का बाकी 18 किलोमीटर के हिस्से को निस्तार के लिए सुरक्षित रखा गया है. परियोजना के तहत केवई नदी को ग्राम ताराबहरा के निकट निर्मित स्टॉपडेम कम रपटा से लिंक नहर के जरिए हसिया नदी के कैचमेंट एरिया स्थित ग्राम रतौरा में जोड़ा जाना है. इस बहुउद्देशीय जल परियोजना की अनुमानित लागत 11449.89 लाख रुपये है. हालांकि, राज्य सरकार ने तकनीकी आपत्ति लगाकर इसकी फाइल लौटा दी है. 

कैसे लागू होगी योजना?

यह परियोजना 2017-18 के बजट में शामिल की गई थी और 2018-19 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान भी किया गया था. इस योजना के तहत डायवर्जन वेयर बनाकर लगभग 51 किलोमीटर लंबी नहर या पाइपलाइन की मदद से हर महीने 0.231 मिलियन घन मीटर पानी हसदेव नदी में छोड़ा जाना प्रस्तावित है. इससे मनेंद्रगढ़ के पांच गांव-रोकड़ा, लोहारी, महाई, मटुकपुर और पुटाडांड की लगभग 500 हेक्टेयर (1235 एकड़) कृषि भूमि को लिफ्ट इरिगेशन प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिल सकेगी. 

वर्तमान में जारी है मनेंद्रगढ़-झगराखांड आवर्धन जल प्रदाय योजना

वर्तमान में हसदेव नदी से पेयजल आपूर्ति के लिए मनेंद्रगढ़-झगराखांड आवर्धन जल प्रदाय योजना संचालित है. इसके अलावा, नगर पंचायत नई लेदरी और खोंगापानी को भी हसदेव नदी से पेयजल आपूर्ति का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. जल संसाधन विभाग के अनुसार, केवई नदी के 45 वर्ग किलोमीटर जलग्रहण क्षेत्र का 15-20 क्यूसेक पानी और बारहमासी प्रवाह का 1-2 क्यूसेक पानी मध्यप्रदेश चला जाता है. इस पानी का उपयोग सिंचाई और निस्तार के लिए किया जा सकेगा.

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कमियों को किया जाएगा दूर-कार्यपालन अभियंता

जल संसाधन विभाग, मनेंद्रगढ़ के कार्यपालन अभियंता नरेंद्र चंद्र सिंह ने बताया कि यह परियोजना अविभाजित कोरिया जिले के समय में सर्वेक्षण के तहत आई थी. प्रोजेक्ट के तहत 51 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे केवई नदी का पानी हसिया नदी के माध्यम से हसदेव नदी में पहुंचेगा. क्योंकि यह एक अंतरराज्यीय नदी है, इसलिए छत्तीसगढ़ शासन अपने हिस्से के पानी का उपयोग करेगा. हालांकि, तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट की फाइल शासन द्वारा वापस भेजी गई है. अब इन कमियों को दूर कर दोबारा प्रशासकीय स्वीकृति के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है.

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