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SECL कोयला खदान में ट्रक मालिक ने की आत्महत्या, खदान प्रबंधन पर उठे कई सवाल, जानें - पूरा मामला

Surajpur Coal Mines Suicide: सूरजपूर के एसईसीएल माइन्स में एक ट्रक के मालिक ने आत्महत्या कर ली. सुबह लोगों को उसका शव एक ट्रक से ली लटका हुआ मिला. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

SECL कोयला खदान में ट्रक मालिक ने की आत्महत्या, खदान प्रबंधन पर उठे कई सवाल, जानें - पूरा मामला
कोयला खदान के अंदर ट्रक मालिक ने लगाई फांसी

Surajpur Crime News: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सूरजपुर जिले के कोयला खदानों (Coal Mines) में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार ने एक बार फिर एक जान ले ली... जिले के आमगांव स्थित SECL की खुली खदान में जांजगीर-चांपा निवासी ट्रक मालिक मनोज जाट ने आत्महत्या कर ली. जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी ही ट्रक के डाला बॉडी में फांसी लगाकर जान दे दी. घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस पूरे मामले में रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद कोई कार्रवाई की जाएगी.

इस वजह से लगा ली फांसी

बताया जा रहा है कि मनोज जाट की ट्रक को SECL अधिकारियों ने ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इसके कारण उनकी गाड़ी पिछले 15 दिनों से खदान के अंदर खड़ी थी और उसे कोयला लोडिंग की अनुमति नहीं मिल रही थी. बार-बार मिन्नतें करने पर शनिवार देर रात ट्रक को लोडिंग के लिए अंदर लिया गया. लेकिन, वहां भी ट्रक को खड़े कर दिया गया. लगातार नुकसान और आर्थिक दबाव से वे तनाव में चल रहे थे. आखिरकार उन्होंने आत्महत्या कर ली.

खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब खदान प्रबंधन की लापरवाही से ट्रक मालिक और चालकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी हो. इस घटना के बाद एक बार फिर खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि खदानों में अव्यवस्था, लापरवाही और भ्रष्टाचार खुलेआम देखने को मिल रहा है.

उत्पादन और परिवहन ठप

जानकारी के अनुसार, इन दिनों क्षेत्र की कई खदानों में उत्पादन और परिवहन बंद पड़ा है. ऐसे में ट्रक मालिक बड़ी संख्या में आमगांव खदान का रुख कर रहे हैं. लेकिन, यहां भी अव्यवस्था कम नहीं है. ट्रकों को 12 से 15 दिन तक लोडिंग की बारी का इंतजार करना पड़ता है. इस वजह से DO होल्डर, ट्रक मालिक, चालक और वेंडर सभी परेशान हैं.

जेब भरने में मस्त अधिकारी

ट्रक चालकों और मालिकों का आरोप है कि खदान प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय जबरन वसूली में लगे रहते हैं. खासकर रोड सेल इंचार्ज जैसे अधिकारी अपनी जेब भरने में मस्त हैं. ट्रक चालकों ने आरोप लगाया कि लगभग सभी कोयला खदानों में लिफ्टर और SECL कर्मचारी 1500 से 2000 रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं. मजबूरी में कई चालक और मालिक पैसा देकर ही गाड़ी को आगे बढ़ा पाते हैं. जो पैसा नहीं देता, उसकी गाड़ी लंबे समय तक खदान में खड़ी रहती है.

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पुलिस जांच जारी

घटना की जानकारी मिलते ही रामानुजनगर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी.

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