Mobile Network Problems in Rural Areas: एमसीबी जिले (MCB District Network Problem) के ग्राम पंचायत सोनहरी (Sonhari Village Mobile Tower) में विकास के दावों की हकीकत उजागर हो रही है. गांव में सात साल पहले बड़े उत्साह के साथ मोबाइल टावर स्थापित किया गया था. उम्मीद थी कि इससे ग्रामीण डिजिटल इंडिया (Digital Connectivity in Sonhari) से जुड़ेंगे, बच्चों की पढ़ाई आसान होगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक तत्काल पहुंच बन पाएगी. लेकिन सात वर्ष बाद भी यह टावर सिर्फ लोहे का खंभा बनकर खड़ा है, आज तक नेटवर्क (Mobile Network Crisis) शुरू नहीं हुआ.

Sonhari Village Mobile Tower: मोबाइल टावर
सिग्नल के लिए 2–3 किलोमीटर दूर भटकते हैं ग्रामीण Mobile Signal Failure
गांव में नेटवर्क न होने की वजह से लोगों को मोबाइल सिग्नल पाने के लिए दो से तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. वहीं यह स्थिति तब है जब सरकार ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी और संचार सुविधाओं के विस्तार की बड़ी-बड़ी बातें करती है.

Mobile Network Problem: मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान ग्रामीण
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को हर दिन जाना पड़ता है गांव से बाहर Network Problems
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गोमती बताती हैं कि बच्चों की ऑनलाइन एंट्री और केवाईसी के लिए उन्हें रोज गांव से बाहर जाना पड़ता है. केंद्र में नेटवर्क न आने के कारण :
- पोर्टल पर जानकारी समय पर अपलोड नहीं हो पाती
- कामकाज प्रभावित होता है
- जवाबदेही का बोझ बढ़ता है
अगर किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ जाए तो विवशता और बढ़ जाती है. नेटवर्क न होने से एंबुलेंस बुलाने में भी भारी दिक्कत आती है.
बच्चों की पढ़ाई पर भी असर, ऑनलाइन क्लास में बाधा
ग्रामीण राज नारायण का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित हो रही है. बच्चों को पढ़ाई या ऑनलाइन क्लास के लिए गांव से दूर जाकर सिग्नल पकड़ना पड़ता है, तब जाकर फोन लगता है और जरूरी काम हो पाता है.

Mobile Network: मोबाइल नेटवर्क की समस्या क्यों है?
टावर तैयार, पर सेवा शुरू क्यों नहीं? ग्रामीणों का सवाल
गांव के निवासी अर्जुन बताते हैं कि टावर तो गड़ा है, लेकिन नेटवर्क सेवा शुरू न होने से गांव वाले खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं. करोड़ों की योजनाओं और विकास के दावों के बीच भी सोनहरी गांव आज बुनियादी संचार सुविधा से वंचित है. ग्रामीणों का कहना है कि “अगर टावर चालू हो जाए, तो गांव भी डिजिटल दुनिया से जुड़ेगा. पढ़ाई, स्वास्थ्य, बातचीत और सरकारी योजनाओं का लाभ गांव में ही मिल सकेगा.”
आम जन में नाराजगी, अधिकारी अब तक खामोश
लोगों का सवाल है कि जब टावर स्थापित कर दिया गया, तो सात साल में भी इसे चालू क्यों नहीं किया गया? गांव वाले अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब जिम्मेदार अधिकारी ध्यान देंगे या फिर वे यूं ही सिग्नल तलाशने गांव से बाहर भटकते रहेंगे.
यह भी पढ़ें : Dantewada: देशी चिकन की जगह बॉयलर मुर्गा परोसा, अधिकारी पर बदतमीज़ी का आरोप; शिक्षकों ने आंदोलन की चेतावनी दी
यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; कुलदीप शर्मा बने बलौदा बाजार कलेक्टर, दीपक सोनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर
यह भी पढ़ें : PMAY: प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही; बेमेतरा में 32 ग्राम पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी
यह भी पढ़ें : मार्च में छुट्टियों पर भी खुलेंगे रजिस्ट्री ऑफिस; 1 अप्रैल से बदलेगी गाइडलाइन दरें, खरीदारों को मिलेगी राहत