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This Article is From Sep 04, 2024

कांकेर : SSB जवान ने की आत्महत्या, खुद की राइफल से शूट कर मौत को लगाया गले

SSB Jawan Commits Suicide : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां नक्सल मोर्चे पर तैनात फिर एक जवान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. जवान ने अपनी सर्विस राइफल से खुद के सिर पर शूट करते हुए अपनी जान ले ली.

कांकेर : SSB जवान ने की आत्महत्या, खुद की राइफल से शूट कर मौत को लगाया गले
फोटो : मृतक जवान

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां नक्सल मोर्चे पर तैनात फिर एक जवान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. जवान ने खुद को गोली क्यों मारी फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. जबकि बताया जा रहा है कि जवान जिले के नक्सल प्रभावित कोसरोंडा 33 बटालियन कैम्प में पदस्थ था. मिली जानकारी के अनुसार, मृतक जवान का नाम राकेश कुमार है. जो उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाला था. सशस्त्र सीमा बल (SSB) के इस जवान की तैनाती कांकेर जिले के धुर नक्सल प्रभावित ताडोकी थाना के कोसरोंडा 33 BN कैम्प में थी. घटना शाम 5 बजे की बताई जा रही है.

खुदकुशी के कारणों का नहीं चला पता

फिलहाल, जवान के शव को अंतागढ़ अस्पताल लाया गया है. जिसकी पुष्टि कांकेर SP  इंदिरा कल्याण एलिसेला ने की है. लेकिन जवान ने खुद के सर्विस रायफल से इस तरह का आत्मघाती कदम क्यों उठाया इस बात की जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है. इधर, पुलिस ने मर्ग कायम करते हुए छानबीन शुरू कर दी है.

पहले भी हो चुकी है इस तरह की घटनाएं

ऐसा पहली दफा नहीं कि नक्सल मोर्चे पर तैनात किसी जवान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की हो. इस तरह की कई घटनाएं बस्तर जैसे नक्सल संवेदनशील इलाकों से निकल कर आती रही है. हर साल जवानों के आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. 8 जून को कांकेर जिले के रावघाट थानांतर्गत फूलफाड़ बीएसएफ कैंप में पदस्थ एक बीएसएफ जवान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. तो वहीं, दंतेवाड़ा में भी एक CRPF जवान ने 27 अगस्त को खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी.

जवानों के डिप्रेशन को लेकर उठाए कदम

आखिर जवान इस तरह का आत्मघाती कदम क्यों उठा रहे है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. हालांकि कुछ साल पूर्व इस पर गहन मंथन करते हुए जवानों से मिलकर बातचीत करने का प्रयास किया गया था, ताकि जवानों को डिप्रेशन से दूर किया जा सके. क्योंकि बस्तर जैसे नक्सल संवेदन शील इलाको में पदस्थ जवान, तनाव से जूझते रहते हैं. परिवार से दूरी, छुट्टी नहीं मिलना या अन्य वजह जवानों के मनोदशा पर प्रभाव डालती है.

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आखिर क्यों जवान का रहे आत्महत्या ?

परिवारिक माहौल तैयार करते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जवानों के बीच पहुंच कर उनकी समस्याएं जानने का प्रयास करते थे. अधिकारी जवानों से अलग से बातचीत किया करते थे, ताकि उनकी समस्या का हल निकाला जा सके. लेकिन वक्त बदल गए पर हालात जस की तस बनी हुई है. जवान आज भी तनाव में है. जिस पर सरकार को एक बार फिर गहन मंथन कर जवानों के तनाव को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए.

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