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पद्म श्री पुरस्कार 2026: 'छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण...', CM साय ने बुधरी-डॉ. रामचंद्र-सुनीता गोडबोले को दीं बधाईं

Padma Shri Awards 2026: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर और जनजातीय अंचलों में मानव सेवा, करुणा और समर्पण की जो मिसाल इन विभूतियों ने प्रस्तुत की है, वो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है.

पद्म श्री पुरस्कार 2026: 'छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण...', CM साय ने बुधरी-डॉ. रामचंद्र-सुनीता गोडबोले को दीं बधाईं

छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी खबर है. यहां के तीन समाजसेवियों को पद्म श्री सम्मान दिया जाएगा. दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार, 25 जनवरी रो पद्म पुरस्कार 2026 के लिए 131 नामों की घोषणा की है. सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं. इस लिस्ट में बस्तर की समाजसेविका बुधरी ताटी, जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ के तीन समाजसेवियों को मिलेगा पद्म श्री सम्मान, CM साय ने दी बधाई

इन तीनों समाजसेवियों को पद्म श्री सम्मान के लिए चयन किया गया है. वहीं 131 नामों की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाली इन तीनों विभूतियों को बधाई व शुभकामनाएं दी है. साथ ही उनके स्वस्थ जीवन की कामना की है.

छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम क्षण- CM साय

सीएम साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट शेयर कर लिखा, 'छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम क्षण बस्तर की समाजसेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी' के नाम से विख्यात बुधरी ताटी जी और जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी व सुनीता गोडबोले जी का पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित होना पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव और सम्मान का विषय है. उन्होंने आगे लिखा, 'प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाले इन तीनों विभूतियों को हृदय से बधाई व शुभकामनाएं.'

तीनों विभूतियों की तपस्या और समर्पण का सम्मान- सीएम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल इन तीनों विभूतियों की तपस्या और समर्पण का सम्मान है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव का विषय भी है.

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत-CM

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर और जनजातीय अंचलों में मानव सेवा, करुणा और समर्पण की जो मिसाल इन विभूतियों ने प्रस्तुत की है, वो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है. उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सेवा भाव से किया गया कार्य सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय पहचान बन जाता है.

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन तीनों विभूतियों ने वर्षों तक मौन साधना की तरह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की सेवा की है और आज देश ने उस सेवा को सम्मान दिया है. यह छत्तीसगढ़ की मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक चेतना और जनजातीय संस्कृति की शक्ति का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है.

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