
Teacher mixed phenyl in Children food: छत्तीसगढ़ के सुकमा पाकेला आवासीय पोटाकेबिन विद्यालय में बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने की घटना ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया.इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. वो ये है कि बच्चों ने संस्था के ही शिक्षक को फिनाइल ले जाकर खाने में डालते हुए देखा था. बाकायदा इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन अफसरों ने शिक्षक पर मेहरबानी दिखाते हुए पूरे मामले को दबाए रखा. इस पूरे मामले की पड़ताल करने के लिए NDTV की टीम भी इस पोटा केबिन में पहुंची. बच्चों ने जो बयान दिए हैं वाकई बेहद गंभीर और हैरान करने वाले हैं...
तीसरी कक्षा के छात्र ने शिक्षक को फिनाइल डालते देखा था
गुरुवार को NDTV की टीम फिनाइल कांड की जमीनी हकीकत जानने के लिए पाकेला पोटाकेबिन पहुंची. इस दौरान पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे मासूम ने फिनाइल मिलाने वाले शिक्षक को पहचान किया. डीएमसी उमाशंकर तिवारी ने बताया कि 22 अगस्त की शाम करीब 4.30 बजे अधीक्षक ने खाने में फिनाइल मिलाए जाने की सूचना दी थी. इसके एक घंटे के भीतर मैं पोटाकेबिन जांच के लिए पहुंचा. उस समय अधीक्षक ने बच्चों से मुलाकात करने से रोक दिया. उनका कहना था कि अभी बच्चों को फिनाइल की जानकारी नहीं दी गई है.
अगर यह बात बच्चों को पता चल गई तो उनके माता—पिता यहां पहुंच जाएंगे और बच्चों को घर ले जाएंगे, जिससे पोटाकेबिन का माहौल बिगड़ सकता है. इसी वजह से उस दिन बच्चों से सीधे बात नहीं हो पाई.
तीसरे दिन मैंने खुद बच्चों से बात की. उसी दौरान तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने फिनाइल मिलाने वाले शिक्षक की पहचान की. अगले दिन जिला प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित की गई इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपी गई.
नाराज अनुदेशकों ने भी खोले राज
कुछ नाराज़ अनुदेशकों ने NDTV को खुलकर बताया कि विभागीय अफसरों ने लापरवाही बरती. वहीं कुछ ने दबी जुबां में स्वीकार किया कि पोटाकेबिन के अंदर शिक्षकों के बीच लंबे समय से आपसी खींचतान चल रही थी. पिछले ढाई—तीन सालों से माहौल ठीक नहीं था. कई बार बहस और झगड़े तक की नौबत आई, लेकिन अफसरों ने मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया. यही वजह रही कि हालात धीरे-धीरे खतरनाक मोड़ तक पहुंच गए और आखिरकार बच्चों की थाली में जहर परोसने की साजिश उजागर हो गई.
अब तक हुई ये कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को निलंबित कर एफआईआर दर्ज की और 14 दिन की न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया. वहीं बीईओ—बीआरसी समेत 15 कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया. लेकिन इस पूरे प्रकरण को लेकर विपक्ष लगातार शासन—प्रशासन पर लापरवाही का आरोप जड़ रहा है.
आरोप है कि घटना के दूसरे दिन ही बच्चों ने आरोपी शिक्षक का नाम बता दिया था, लेकिन अधिकारियों ने पूरे चार दिन तक जांच के नाम पर मामले को दबाए रखा. आखिरकार जब मीडिया में मामला तूल पकड़ गया और हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया, तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई.
31 स्टाफ मौजूद, लेकिन किसी ने नहीं देखा शिक्षक को किचन जाते हुए...
पोटाकेबिन में कुल 31 कर्मचारी तैनात हैं—15 अनुदेशक, 10 रसोइये और 6 शिक्षक. घटना वाली रात आरोपी शिक्षक अपने कमरे से करीब 20–25 मीटर दूर बने किचन शेड तक गया और सब्जी में फिनाइल मिलाकर लौट आया. हैरानी की बात यह है कि इतने कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद किसी ने भी उसे नहीं देखा. जांच के दौरान भी न तो अनुदेशकों ने, न रसोइयों ने और न ही बाकी शिक्षकों ने किसी तरह की जानकारी देने की बात स्वीकारी.
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