Corruption News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्कूलों में शौचालय निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने करोड़ों रुपये के इस मामले में ठेकेदार पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि पैसा वापस करो, वरना जेल जाने के लिए तैयार रहो.
जानकारी के अनुसार, जिले के 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए बड़ी राशि स्वीकृत की गई थी. यह काम आदिवासी विकास विभाग के तहत कराया जाना था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि करीब 7 महीने बीत जाने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हुआ. जांच में सामने आया कि 116 में से केवल 23 स्थानों पर ही काम की औपचारिक शुरुआत हुई, जबकि 93 स्कूलों में एक ईंट तक नहीं रखी गई.
काम से पहले एडवांस भुगतान
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही संबंधित निजी फर्म को 61.88 लाख रुपये का एडवांस भुगतान कर दिया गया. यह भुगतान नियमों को दरकिनार कर किया गया, जिससे पूरे मामले में सांठगांठ और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है. स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया की जानकारी कई ठेकेदारों तक पहुंची ही नहीं, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
कलेक्टर ने 93 कार्यादेश किया निरस्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 1.23 करोड़ रुपये के 93 निर्माण कार्यों को निरस्त कर दिया है. प्रशासन ने इसे शासकीय राशि का दुरुपयोग मानते हुए सख्ती शुरू कर दी है.
15 दिन में पैसा लौटाओ , वरना होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने संबंधित फर्म को 45.85 लाख रुपये की एडवांस राशि 15 दिनों के भीतर वापस करने का निर्देश दिया है. कलेक्टर ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय में राशि वापस नहीं की गई, तो राजस्व वसूली के तहत संपत्ति कुर्क करने सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश
गरियाबंद प्रशासन की यह कार्रवाई उन सभी ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो विकास कार्यों में लापरवाही या अनियमितता बरतते हैं. बच्चों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े ऐसे मामलों में अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फर्म समय पर राशि वापस करेगी या मामला और आगे बढ़ेगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि इस घोटाले की जांच की आंच और किन किन अधिकारियों तक पहुंचती है.