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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन पर फिलहाल रोक, अंतिम आदेश नहीं होंगे जारी

Chhattisgarh Police constable promotion: छत्तीसगढ़ के 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका में कहा कि इससे उन आरक्षकों को नुकसान होता, जो लंबे समय से एक ही जिले में सेवा दे रहे हैं.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन पर फिलहाल रोक, अंतिम आदेश नहीं होंगे जारी

Chhattisgarh Police constable promotions: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रही पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने साफ किया है कि विभागीय प्रमोशन प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी तरह का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा. मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई. कोर्ट ने यह अंतरिम राहत 72 से अधिक आरक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दी है. मामले की अगली सुनवाई अब 15 जून को निर्धारित की गई है.

क्या है पूरा मामला?

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इन दिनों आरक्षकों से प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है. इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोरबा जिले में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में राज्य शासन, गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर रेंज, एसपी कोरबा सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है.

ट्रांसफर और सीनियरिटी को लेकर विवाद

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रमोशन प्रक्रिया में उन पुलिसकर्मियों को भी वरिष्ठ मानकर सूची में आगे रखा जा रहा है, जिन्होंने अपनी इच्छा से दूसरे जिलों में ट्रांसफर लिया था. याचिका में दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा शर्त नियम 2007 में संशोधन के बाद स्पष्ट प्रावधान है कि स्वेच्छा से दूसरे जिले में स्थानांतरण लेने वाले कर्मचारी की वरिष्ठता नए जिले में सबसे नीचे मानी जाएगी. इसके बावजूद वर्तमान प्रमोशन प्रक्रिया में मूल नियुक्ति तिथि के आधार पर उन्हें लाभ देने का आरोप लगाया गया है.

1 जून को जारी होनी थी फाइनल फिट लिस्ट

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं होता तो 1 जून 2026 को अंतिम फिट लिस्ट जारी कर दी जाती. इससे उन आरक्षकों को नुकसान होता जो लंबे समय से एक ही जिले में सेवा दे रहे हैं. वहीं राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को याचिका में चुनौती नहीं दी गई है. सरकार ने यह भी कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, कई याचिकाकर्ताओं के नाम भी फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं.

हाईकोर्ट ने माना मामला सेवा नियमों से जुड़ा है

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि मामला सेवा नियमों के पालन से जुड़ा हुआ है. इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति अपनी प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन न्यायालय की अनुमति के बिना अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किए जाएंगे.

बिलासपुर संभाग में 795 आरक्षक प्रमोशन के लिए पात्र

आईजी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर संभाग में कुल 795 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक पद के लिए पात्र पाया गया है.

जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं-

  • बिलासपुर-  230
  • रायगढ़- 230
  • कोरबा- 85
  • जांजगीर-चांपा- 60
  • मुंगेली- 40
  • गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- 40
  • सारंगढ़-बिलाईगढ़- 60
  • सक्ती- 50

प्रमोशन के लिए ट्रांसफर का पुराना खेल

पुलिस विभाग में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कई पुराने जिलों के आरक्षक पदोन्नति की संभावना बढ़ाने के लिए नवगठित जिलों में ट्रांसफर करवा लेते हैं. वहां सीनियरिटी सूची में जल्दी ऊपर आने का फायदा मिलता है और प्रथम नियुक्ति तिथि के आधार पर उन्हें जल्द प्रमोशन मिल जाता है.
बताया जाता है कि प्रमोशन मिलने के बाद कई कर्मचारी दोबारा अपने पुराने जिले में वापसी भी करा लेते हैं. इसी व्यवस्था को लेकर अब न्यायालय में सवाल उठाए गए हैं.

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