छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारी पर ही प्रशासनिक कार्रवाई होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. लवन थाना प्रभारी रहे निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह को पहले राजदेवरी स्थानांतरित किया गया और फिर दो दिनों के भीतर ही पुलिस अधीक्षक ने दूसरा आदेश जारी कर उन्हें लाइन अटैच कर दिया. हालांकि दोनों आदेशों में तबादले का कारण “प्रशासनिक” बताया गया है, लेकिन कार्रवाई के समय और तेजी ने पूरे घटनाक्रम को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है.
सूत्रों के अनुसार, निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने दो दिन पहले ही लवन थाना क्षेत्र में बहने वाली महानदी का सीना छलनी कर अवैध रेत खनन और परिवहन कर रहे हाइवा और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया था. महानदी क्षेत्र में लंबे समय से जारी अवैध खनन और परिवहन पर यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही थी. लेकिन कार्रवाई के तुरंत बाद पहले उनका तबादला राजदेवरी किया गया और फिर नया आदेश जारी कर उन्हें पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया. दो दिनों में दो आदेश जारी होने से प्रशासनिक अमले में भी हलचल तेज हो गई है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में जब भी कोई अधिकारी अवैध खनन के खिलाफ सख्ती दिखाता है, उसे पद से हटा दिया जाता है. लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से यह संदेश जाता है कि जो अधिकारी नियमों का पालन करवाएगा, उसी पर कार्रवाई होगी. लोगों का यह भी कहना है कि अगर कार्यवाही करने वाले अधिकारियों के ऊपर ही इस तरह की कार्यवाही होती रही तो भविष्य में कोई भी अधिकारी जोखिम लेकर अवैध खनन पर सख्त कदम उठाने से बचेगा. इसका सीधा लाभ खनन माफियाओं को मिलेगा और अवैध खनन व परिवहन का कारोबार और फलता-फूलता रहेगा.
टास्क फोर्स पर भी उठे सवाल
बलौदा बाजार जिले में अवैध खनन रोकने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है. इसमें राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम शामिल है. उद्देश्य था कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी रोक लगाई जाए. लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि जब टास्क फोर्स की टीम में शामिल पुलिस अधिकारी कार्रवाई करते हैं, तो उन्हें ही हटाया जा रहा है. ऐसे में टास्क फोर्स की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई से माफिया को संरक्षण देने की चर्चा हुई शुरू
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि थानेदार को हटाने की कार्यवाही एक तरह से खनन माफियाओं को अप्रत्यक्ष संरक्षण देने जैसी प्रतीत हो रही है. हालांकि प्रशासन की ओर से इस तरह के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. आदेश में स्पष्ट रूप से तबादले को “प्रशासनिक कारणों” से किया जाना उल्लेखित है, लेकिन घटनाक्रम की टाइमिंग को लेकर चर्चा थम नहीं रही है.
दोनों आदेशों को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज है. दो दिनों में दो आदेश जारी होने से प्रशासनिक अमले में भी चर्चा हो रही है. सूत्रों का कहना है कि लगातार आदेशों से विभागीय स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अवैध खनन के खिलाफ अभियान उसी तीव्रता से जारी रहेगा या फिर यह घटनाक्रम अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करेगा.