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CG Vidhan Sabha Budget Satra 2026: जंबूरी विवाद पर हंगामा, सड़कों पर भी उठे सवाल, कांग्रेस का वॉकआउट

CG Vidhan Sabha Budget Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में जंबूरी आयोजन की कथित अनियमितताओं पर हंगामा. विपक्ष ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर वॉकआउट किया. सरकार ने दी सफाई.

CG Vidhan Sabha Budget Satra 2026: जंबूरी विवाद पर हंगामा, सड़कों पर भी उठे सवाल, कांग्रेस का वॉकआउट
CG Vidhan Sabha Budget Satra 2026: जंबूरी विवाद पर हंगामा, सड़कों पर भी उठे सवाल, कांग्रेस का वॉकआउट

CG Vidhan Sabha Budget Satra 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र (Chhattisgarh Assembly Budget Session) का बुधवार को आठवां दिन हंगामे और आरोप‑प्रत्यारोप के बीच बीता. कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू हुई. इसी दौरान विधायक उमेश पटेल ने जंबूरी आयोजन में हुई कथित अनियमितताओं का मामला उठाया. उन्होंने सरकार से यह पूछा कि जंबूरी के लिए निविदा कितनी बार लगाई गई, किन तिथियों पर लगाई गई और इन्हें निरस्त करने की वजह क्या थी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था. पटेल ने आरोप लगाया कि पहले से ही तय था कि टेंडर किसे दिया जाएगा. इसी आरोप के आधार पर विपक्ष ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया. उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच विधायक दल समिति से कराने की भी मांग की.

भूपेश बघेल का सरकार पर सीधा हमला

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जंबूरी मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि यह मामला पहले भी अध्यक्ष पद की कानूनी लड़ाई से जुड़ा रहा है और इसमें संबंधित सांसदों की भूमिका भी रही है. उन्होंने दावा किया कि कई कार्यों में टेंडर जारी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था, जो स्पष्ट रूप से अनियमितता दर्शाता है. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वह इस मामले में उच्च स्तरीय समिति से जांच की घोषणा करेगी.

शिक्षा मंत्री की सफाई : ‘दो बार टेंडर, पहले में तकनीकी दिक्कतें'

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि जंबूरी आयोजन के लिए दो बार टेंडर जारी किए गए थे. पहला टेंडर 10 दिसंबर को लगा था लेकिन तकनीकी दिक्कतों और कठोर नियमों के चलते स्थानीय प्रतिभागी इसमें भाग नहीं ले पा रहे थे, इसलिए उसे निरस्त किया गया. उसके बाद 23 दिसंबर को दूसरा टेंडर जारी किया गया, जिसमें अनुभव, मानव संसाधन, टर्नओवर और तकनीकी योग्यता जैसी शर्तों में ढील दी गई. मंत्री ने कहा कि यह सभी बदलाव नेशनल स्काउट गाइड परिषद की अनुमति से हुए और जंबूरी का टेंडर जेम पोर्टल पर प्रकाशित किया गया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो काम टेंडर से पहले शुरू हुआ था, वह नेशनल टीम के हिस्से का कार्य था. मंत्री ने पूरे मामले में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से इनकार किया.

स्काउट गाइड परिषद पर भी उठे सवाल

विधायक उमेश पटेल ने यह भी पूछा कि उस समय स्काउट गाइड परिषद का अध्यक्ष कौन था और क्या परिषद पहले भंग की गई थी. इस पर मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री स्वतःस्काउट गाइड परिषद के अध्यक्ष होते हैं और परिषद कभी भंग नहीं होती. हालांकि, जब शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते हैं तो वे अध्यक्ष पद से भी हट जाते हैं.

सड़कों और पुल‑पुलियों पर सरकार घिरी

सदन में रायपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े सड़क और पुल‑पुलिया निर्माण के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. विधायक विक्रम उसेंडी ने कहा कि कई परियोजनाओं को 2010 में स्वीकृति मिली थी और 2013 तक पूरा होना था, लेकिन 60 साल पुराने पुलों का जीर्णोद्धार अब तक नहीं किया गया है. उन्होंने 11 सड़कों और पुल‑पुलियों के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर सरकार से जवाब मांगा.

उप मुख्यमंत्री का जवाब : ‘20 कार्य अधूरे, एक नया ब्रिज लगभग तैयार'

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सड़कों की घोषणा पहले की जा चुकी थी और सरकार भी स्थिति को लेकर चिंतित है. उन्होंने बताया कि कांकेर जिले का पाखंजूर मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां 91.600 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम प्रस्तावित था. कुल 134 में से 114 पुल‑पुलियों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 20 कार्य अधूरे रह गए क्योंकि ठेकेदार काम छोड़कर चला गया. उन्होंने बताया कि राज्य मद से दो नए ब्रिज स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से एक का निर्माण अंतिम चरण में है.

उद्योगों से भू‑जल प्रदूषण का मुद्दा उठा

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान विधायक अनुज शर्मा ने उद्योगों द्वारा रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों को भूमिगत जल स्रोतों में छोड़े जाने का गंभीर मुद्दा सदन में उठाया. उन्होंने कहा कि कैमिकल मिश्रण के कारण भू‑जल स्रोत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं, जिससे पानी अब पीने योग्य नहीं रह गया है. बावजूद इसके न तो कोई कार्रवाई हो रही है और न ही भू‑जल की नियमित जांच की जा रही है. इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने चिंता को जायज बताते हुए कहा कि उद्योगों से वेस्ट एसिड निकलता है, जिससे समस्या उत्पन्न होती है. उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी. मंत्री ने कहा कि पेय जल की दृष्टि से लोगों के जीवन से खिलवाड़ किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा.

रिकेश सेन को धमकी का मुद्दा गरमाया, विपक्ष का बहिर्गमन

शून्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधायक रिकेश सेन को जान से मारने की धमकी का मुद्दा उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए. उनके अनुसार यह सदस्य की सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए. इस विषय पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और उसके बाद बहिर्गमन कर दिया. विधायक उमेश पटेल ने भी कहा कि यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है, सरकार को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

अध्यक्ष और संसदीय मंत्री का पक्ष

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन को इस मामले की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सदस्य की ओर से ऐसी कोई जानकारी दी जाती तो सदन इसकी जानकारी रखता और जवाब भी अवश्य आता. संसदीय मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विधायक पूरी तरह सुरक्षित हैं और सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है.

भूपेश बघेल का दावा : ‘विधायक ने धमकी की बात मानी'

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने स्वयं विधायक रिकेश सेन से बात की और विधायक ने इस धमकी की बात को स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे थे कि विभागीय मंत्री इस पर सदन में जवाब देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बघेल ने दावा किया कि धमकी के कारण विधायक सदन में उपस्थित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले का निराकरण नहीं होगा, तब तक विधायक कार्रवाई में भाग नहीं लेंगे.

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