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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश; सदन में विपक्ष का हंगामा, गृह मंत्री ने SC का दिया हवाला

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: इस विधेयक को पिछले सप्ताह मंत्रिपरिषद की बैठक में मंज़ूरी दी गई थी. मंत्रिपरिषद से मंज़ूरी मिलने के बाद गृहमंत्री ने कहा था कि यह विधेयक 1968 से चले आ रहे प्रावधानों का विस्तार करता है, जिसमें लालच के नए तरीकों को भी शामिल किया गया है. फिलहाल, राज्य में 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968' लागू है. इसे मध्य प्रदेश से अलग होकर वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद वहां से (मध्य प्रदेश से) अपनाया गया था.

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश; सदन में विपक्ष का हंगामा, गृह मंत्री ने SC का दिया हवाला
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश; सदन में विपक्ष का हंगामा, गृह मंत्री ने SC का दिया हवाला

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: रायपुर विधानसभा (Raipur Vidhan Sabha) में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 (Chhattisgarh Dharma Swatantrya Bill 2026) को पेश किए जाने के साथ ही सदन में जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली. गृह मंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा, जिस पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत (Charandas Mahant) ने कड़ी आपत्ति जताई. विपक्ष का कहना था कि इस तरह के मामलों से जुड़े प्रकरण पहले से ही देश के 11 राज्यों में सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, ऐसे में राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा उचित नहीं है. रायपुर से ज़ुल्फ़िकार अली की रिपोर्ट.

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: सदन में हंगामा

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: सदन में हंगामा

विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने की मांग

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि जब समान विषय पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है, तब नया कानून लाने से बचना चाहिए. उन्होंने विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपने की मांग की, ताकि इस पर व्यापक विचार‑विमर्श हो सके.

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 का प्रारूप

 प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा. 

  •  यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा.
  •  विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.
  • सोशल मीडिया के ज़रिए भी प्रलोभन दिया जाएगा उसे भी अपराध माना जाएगा 
  • कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है.
  •  यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है.
  •  सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है.
  •  विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी.

‘घर वापसी' अभियान पर नहीं पड़ेगा असर

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र विधेयक 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार हिंदूवादी संगठनों के ‘घर वापसी' अभियानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने पैतृक धर्म या पूर्व आस्था में की गई वापसी को इस अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा. हालांकि, विधेयक के जरिए जबरन, प्रलोभन, गलत जानकारी या दबाव के माध्यम से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर सख्ती से रोक लगाने की कोशिश की गई है. इसमें ‘चंगाई सभा' जैसे आयोजनों को भी दायरे में लाया गया है.

विधेयक में धर्म परिवर्तन समारोह की परिभाषा तय करते हुए इसे किसी व्यक्ति के एक विश्वास प्रणाली से दूसरी में परिवर्तित होने की प्रक्रिया बताया गया है. साथ ही, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए धर्म परिवर्तन के प्रचार‑प्रसार पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है.

डिजिटल मोड में सोशल नेटवर्किंग साइट्स, एप्लीकेशन, वेबसाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम शामिल किए गए हैं.

विधेयक में ‘बल' की परिभाषा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दी गई है, जिसमें बल प्रयोग या सामाजिक बहिष्कार की धमकी शामिल है. इसके अलावा एक ही समारोह में दो या अधिक व्यक्तियों के धर्म परिवर्तन को सामूहिक धर्म परिवर्तन, जबकि झूठे या भ्रामक शब्दों या कार्यों से प्रेरित धर्म परिवर्तन को दुर्व्यपदेशन की श्रेणी में रखा गया है.

विधेयक में ‘व्यक्ति' की परिभाषा व्यापक रखते हुए इसमें व्यक्ति, कंपनी या व्यक्तियों के किसी भी निकाय को शामिल किया गया है, जबकि ‘विहित' शब्द का अर्थ अधिनियम के तहत बनाए जाने वाले नियमों से जोड़ा गया है.
 

BJP विधायक अजय चंद्राकर ने किया बचाव

विधेयक पर उठी आपत्तियों के जवाब में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि इस कानून में कहीं कोई विधिक खामी नहीं है. उन्होंने दावा किया कि विधेयक पूरी तरह विधि‑सम्मत है और सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए लाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक नहीं: विजय शर्मा

गृह मंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष की आपत्तियों पर जवाब देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस विषय पर कोई स्टे नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि राज्य सरकारें इस विषय पर नया कानून नहीं बना सकतीं. विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने प्रवर समिति में भेजने को लेकर फीडबैक भी लिया है और सभी सदस्यों को विधेयक पर सहमति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए.

आसंदी ने आपत्ति खारिज की, विपक्ष नाराज़

आसंदी द्वारा नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति को खारिज किए जाने के बाद विपक्ष नाराज़ हो गया. इसके विरोध में विपक्षी विधायकों ने दिनभर की सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और सदन से बाहर निकल गए.

विपक्ष पर गृह मंत्री का तीखा हमला

विजय शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है, विपक्ष बहिर्गमन और बहिष्कार का रास्ता अपनाता है. उन्होंने इसे “पलायन” करार देते हुए कहा कि विपक्ष को आदिवासी समाज की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है.

सदन में नारेबाज़ी, माहौल गर्माया

गृह मंत्री के बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया. सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए, जबकि विपक्षी विधायक बहिष्कार करते हुए नारेबाज़ी के साथ सदन से बाहर निकल गए. पूरे घटनाक्रम के चलते विधानसभा में दिनभर राजनीतिक तनाव की स्थिति बनी रही.

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