Private School Association CG: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून यानी आरटीई (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर इस साल नया विवाद खड़ा हो गया है. प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और फीस में बढ़ोतरी न होने पर असहयोग आंदोलन की चेतावनी दी है. निजी स्कूल एसोसिएशन ने इस संबंध में राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, जिससे आने वाले शैक्षणिक सत्र में आरटीई सीटों और बच्चों की पढ़ाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
13 सालों से नहीं बढ़ी फीस, संचालकों ने दी चेतावनी
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि आरटीई के तहत मिलने वाली प्रति विद्यार्थी फीस में पिछले 13 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. उन्होंने सरकार को लिखे पत्र में साफ किया है कि इस दौरान विधायकों के फंड से लेकर सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह तक में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन स्कूलों को मिलने वाली राशि जस की तस है. राजीव गुप्ता ने यह भी बताया कि इस मामले में हाई कोर्ट से भी उनके पक्ष में फैसला आया है, लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानती है, तो वे सरकार के साथ किसी भी तरह का सहयोग बंद कर देंगे.

फीस का गणित और पड़ोसी राज्यों से तुलना
निजी स्कूलों की मांग है कि महंगाई के इस दौर में वर्तमान फीस काफी कम है. आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में अभी प्राइमरी स्तर पर एक बच्चे के लिए सरकार 7,000 रुपये प्रति सत्र देती है, जिसे स्कूल संचालक बढ़ाकर 18,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. इसी तरह मिडिल स्कूल की राशि को 11,500 से बढ़ाकर 22,000 और 9वीं से 12वीं तक की फीस को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की जा रही है. छत्तीसगढ़ की तुलना में दिल्ली में न्यूनतम 25,000 और राजस्थान में 16,000 रुपये सरकार द्वारा दिए जाते हैं, जिसके आधार पर यहां के स्कूल संचालक भी वृद्धि की मांग कर रहे हैं.
कैसा होगा स्कूलों का असहयोग आंदोलन?
इस विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका असर स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों पर पड़ेगा? इस पर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य गरीब बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करना नहीं है. असहयोग आंदोलन के तहत वे सरकार को उन कामों में मदद देना बंद करेंगे जो स्कूल अक्सर करते हैं. मसलन, सरकारी आयोजनों में निजी स्कूलों की बसों का इस्तेमाल करना, स्कूल स्टाफ की ड्यूटी लगाना या अन्य प्रशासनिक सहयोग देना. एसोसिएशन जल्द ही बैठक कर यह निर्णय लेगा कि सरकार को किस-किस स्तर पर असहयोग करना है?
एंट्री क्लास को लेकर भी बढ़ा विवाद
फीस के अलावा दाखिले की क्लास को लेकर भी सरकार और स्कूल संचालकों के बीच ठन गई है. छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके मुताबिक अब आरटीई के तहत सिर्फ कक्षा पहली में ही दाखिला लिया जा सकेगा. जबकि पहले नियम यह था कि जिस क्लास से स्कूल शुरू होता है (एंट्री क्लास), वहीं से दाखिला दिया जाता था. सरकार के इस फैसले को निजी स्कूलों ने तकनीकी रूप से गलत बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी है. स्कूल संचालकों का मानना है कि इससे आरटीई के तहत मिलने वाली सीटों में भारी कमी आ सकती है.
सरकार का पक्ष और शिक्षा मंत्री का बयान
निजी स्कूलों की इस चेतावनी के बाद सरकारी महकमे में हलचल तेज है. इस पूरे विवाद पर छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है कि सरकार निजी स्कूल एसोसिएशन के पत्र पर गंभीरता से विचार कर रही है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरटीई फीस का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से आता है और राज्य का हिस्सा इसमें छोटा होता है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले में केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे ताकि फीस बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा सके. फिलहाल, सरकार और स्कूलों के बीच यह तकरार सुलझती है या और बढ़ती है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
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