
बड़वानी शहर जो शांति का टापू कहा जाता है, यहां पर बड़ी ही अकीदत से और धूमधाम से मोहर्रम का त्योहार मनाया गया. बड़वानी शहर में ताजियों को देखने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र समेत मप्र के कई जिलों से लोग आते हैं. यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिलती हैं. पूरी रात सभी समाज के लोग ताजियों को देखने आते हैं. हिंदू समाज के लोग भी यहां दर्शन करते हैं और ताजियों पर लोभान ओर शिरनी चढ़ाते हैं. वहीं, ताजिए की जियारत करने आए लोगों के लिए जगह-जगह कोल्ड ड्रिंक्स और नाश्ते के स्टाल लगाए गए.
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समाज के वरिष्ठ एडवोकेट कमरुज्जमा शेख ने बताया कि बड़वानी शहर के ताजिये मप्र के अलावा भारत और विदेशों में भी मशहूर हैं. ताजियों की कलाकारी इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, टर्की जैसे देशों से लोग वीडियो कॉलिंग के जरिये देखते हैं. कमरुज्जमा शेख ने यह भी बताया कि बड़वानी शहर के हिंदू भाई भी ताजिये बनाने में अपना दान देते हैं.

पूरे प्रोग्राम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे
मजीद शेख ने बताया 1 से 10 तक के ताजियों को प्रतियोगता में रखा गया है. इसमें सभी ताजियों को नगद ओर शील्ड का इनाम दिया जाएगा. समाज सेवी अनीस कुरेशी बताते हैं कि हमें गर्व है कि बड़वानी शहर की आवाम पर जो यहां से पूरे देश और दुनिया को शांति का पैगाम देती है. यहां पर सभी त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते हैं. ताजियों की कलाकारी जो बड़वानी में बनाए जाते हैं, पूरे देश में ऐसी कलाकारी कहीं नहीं बनाई जाती. बड़वानी मोहर्रम के त्योहार में बड़वानी नगर पालिका प्रशासन का भी अहम योगदान है. यहां रात्रि में ताजियों के लिए पूरे बड़वानी शहर में लाइटिंग की भरपूर व्यवस्था की गई.

बड़वानी शहर में छोटे-बड़े लगभग 50 ताजिये बनाए गए
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बड़वानी एसडीओपी रूप रेखा यादव ने बताया कि पुलिस प्रशासन ने पूरे प्रोग्राम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात थे. शांति बनाए रखने के लिए लगातार शासन की तरफ से गस्त ओर फ्लैग मार्च निकाला गया. ड्रोन से भी वीडियोग्राफी की गई. एसडीओपी रूप रेखा यादव ने यह भी बताया कि बड़वानी शहर में छोटे-बड़े लगभग 50 ताजिये बनाए गए.