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गौ भक्त की अनूठी शादी! गायों के लिए आयोजित किया विशेष भंडारा,  छप्पन प्रकार के रखे व्यंजन 

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के आयुष यादव ने अपनी शादी को अनूठे अंदाज़ में मनाते हुए गायों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया, जिसमें छप्पन प्रकार के व्यंजन रखे गए. बिना दहेज विवाह कर उन्होंने सामाजिक संदेश दिया और सात वर्षों से चल रही अपनी गौ सेवा परंपरा को शादी से भी जोड़ा.

गौ भक्त की अनूठी शादी! गायों के लिए आयोजित किया विशेष भंडारा,  छप्पन प्रकार के रखे व्यंजन 

Unique Indian Wedding: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज निवासी 24 वर्षीय आयुष यादव ने अपनी शादी को सेवा और संस्कार से जोड़कर अनोखी मिसाल पेश की. बिना दहेज विवाह करने के साथ‑साथ उन्होंने शादी से एक दिन पहले गायों के लिए विशेष भंडारा आयोजित किया, जिसमें छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया. परिवार का कहना है कि विवाह जैसे पावन अवसर पर गौ सेवा को सर्वोपरि रखकर समाज को संदेश देना ही उद्देश्य था. आयुष बचपन से भगवान श्रीकृष्ण‑राधा के भक्त हैं.

विवाह स्थल पर बारात और मेहमानों के साथ गायों के लिए भी खास इंतजाम किए गए. करीब ढाई क्विंटल मक्का‑गेहूं पिसवाकर, हरा चारा मंगवाया गया और छप्पन भोग का प्रसाद लगाकर गौ माताओं की पूजा‑अर्चना की गई. दूल्हे आयुष ने स्वयं गौ पूजन किया और गोग्रास खिलाया, जिसके बाद विवाह की रस्में शुरू हुईं. इस पहल की पूरे नगर में सराहना हो रही है. आयुष के पिता अनिल यादव (जिलाध्यक्ष, यादव महासभा रायसेन) ने कहा कि “विवाह का असली सौंदर्य सेवा और संस्कार से है.”

सात वर्षों से नि:स्वार्थ गौ सेवा

आयुष पिछले सात साल से गौ सेवा में सक्रिय हैं. उन्होंने अपना मोबाइल नंबर नगरभर में साझा कर रखा है ताकि घायल या बेसहारा मवेशी दिखने पर लोग तुरंत सूचना दें. वे अक्सर बाइक से मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार करते हैं और जरूरत पड़ने पर लोडिंग ऑटो से पशु को घर लाकर पूरी तरह स्वस्थ होने तक देखभाल करते हैं. स्वस्थ होने पर पशु को उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है. यह सेवा वे निजी खर्च पर और निशुल्क करते हैं लोग सहयोग करना चाहें तो वे नकद नहीं, सिर्फ दवाइयां या भूसा स्वीकारते हैं.

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बरसात में ‘फुल अलर्ट' मोड

आयुष बताते हैं कि बरसात के चार महीनों में वे शहर से बाहर कोई कार्यक्रम नहीं रखते, क्योंकि इस मौसम में फिसलन और दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, जिससे मवेशी अधिक घायल होते हैं. ऐसे समय में वे पूरी तरह मुस्तैद रहते हैं रात में भी कॉल आने पर तुरंत निकल पड़ते हैं. उनके मुताबिक, “गौ सेवा से मन को सुकून मिलता है. शादी जीवन का सबसे बड़ा उत्सव है, इसे सेवा और संस्कार से जोड़ना ही हमारा संकल्प था.”

दहेज‑मुक्त, सेवा‑युक्त विवाह

आयुष का विवाह दहेज‑मुक्त रहा. परिवार और समाज को उन्होंने संदेश दिया कि खुशी के हर अवसर को सेवा, पर्यावरण और पशु‑कल्याण से जोड़ा जा सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी शादियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, जहां दिखावे की जगह कर्तव्य, संवेदना और परंपरा का सम्मान हो. आयुष की यह पहल न सिर्फ गौ‑भक्ति, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बन गई है.

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