Khet Bachao Abhiyan: देशभर में किसानों को जागरूक करने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून तक “खेत बचाओ अभियान” चलाने जा रही है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला राष्ट्रीय अभियान बताया है. दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस संतुलित उर्वरक उपयोग, बदलते मौसम के मुताबिक खेती की सलाह और पंचायत स्तर तक सहभागिता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए. इस एक महीने के अभियान के जरिए सरकार खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है.
पहले सुनिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा, देखिए Video
किसानों में जन-जागरण के लिए 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा।
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) May 29, 2026
अभियान के दौरान KCC निर्माण, Soil Health Card वितरण, कृषि यंत्रीकरण एवं विभिन्न योजनाओं के लाभ भी किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
- माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी pic.twitter.com/zx1DgZwrnO
1 जून से 30 जून तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान
“खेत बचाओ अभियान” की शुरुआत 1 जून से होगी और यह पूरे महीने यानी 30 जून तक देशभर में चलाया जाएगा. इसका उद्देश्य किसानों तक सीधे पहुंचकर उन्हें खेती से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देना है. सरकार इस अभियान को बड़े स्तर पर प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है.
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी ने आज नई दिल्ली में 'खेत बचाओ अभियान' की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) May 30, 2026
बैठक में 1 जून से 30 जून तक देशभर में चलने वाले अभियान को पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक जनभागीदारी के मॉडल पर… pic.twitter.com/UA10rghYvt
संतुलित उर्वरक उपयोग पर रहेगा खास जोर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में स्पष्ट किया कि अभियान का मुख्य फोकस रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना होगा.
- मृदा परीक्षण आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा
- सही मात्रा में खाद उपयोग की सलाह दी जाएगी
- जैविक और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा
- एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) को लागू किया जाएगा
इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और खेती की लागत में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.
मौसम और बाजार के अनुसार मिलेगी सलाह
अभियान के तहत किसानों को मौसम, मिट्टी और बाजार की स्थिति के आधार पर फसल चयन की सलाह दी जाएगी. कृषि विशेषज्ञ किसानों को यह बताएंगे कि किन परिस्थितियों में कौन-सी फसल बेहतर है? कम पानी में कौन-से विकल्प अपनाएं. फसल विविधीकरण कैसे करें? इससे किसानों को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.
पंचायत से केंद्र तक समन्वय का मॉडल
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि पंचायत से राज्य और केंद्र तक साझा भागीदारी के मॉडल पर चलेगा.
- पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी
- कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचाया जाएगा
- स्थानीय स्तर पर मशीनरी और संसाधनों का वितरण संभव होगा
KVK और ICAR की टीमों को बड़ी जिम्मेदारी
अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए देशभर में बड़ी टीमों का गठन किया गया है:
- 1600 से अधिक टीमें सक्रिय रहेंगी
- 100 अधिक उर्वरक उपयोग वाले जिलों के लिए 500 विशेष टीमें
- KVK, ICAR और कृषि विभाग के वैज्ञानिक मिलकर काम करेंगे
- 1150 से ज्यादा बहुविषयक टीमें किसानों तक पहुंचेंगी
ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को प्रशिक्षण और सुझाव देंगी.
योजनाओं के साथ-साथ इसका लाभ भी मिलेगा
इस अभियान को केवल खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसके साथ कई अन्य योजनाओं को भी जोड़ा गया है:
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
- पीएम किसान योजना
- दलहन-तिलहन और ऑयल पाम मिशन
- जल संरक्षण और मिट्टी स्वास्थ्य कार्यक्रम
इससे किसानों को एक ही मंच पर कई लाभ मिल सकेंगे.
लक्ष्य: कम लागत, बेहतर मिट्टी, जागरूक किसान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यही है कि संदेश व्यवहारिक हो, जमीन पर दिखे और स्थानीय संरचना उससे जुड़ी हो. इसलिए फर्टिलाइजर के कम और संतुलित उपयोग, मौसम के अनुरूप खेती की सलाह, पंचायत-स्तर की सक्रियता, मशीनरी और योजनाओं के लाभ का समावेश तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी; इन बुनियादी बिंदुओं पर अभियान के दौरान ध्यान रखा जाए. अभियान की दिशा साफ है: खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो.
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