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हरी मिर्च ने बदल दी किस्मत, शिवपुरी के किसान 300 बीघा में उगा रहे, यहीं गांव की पहचान

सरपंच रामप्रकाश धाकड़ के अनुसार, जंगल होने के कारण यहां खेती का रकबा करीब 1 हजार बीघा है. पहले यहां की लाल मिर्च की मांग अशोकनगर, मुरैना समेत आसपास के जिलों में अधिक थी, लेकिन अब हरी मिर्च की मांग बढ़ने से किसान खरीफ सीजन में करीब 300 बीघा में इसका उत्पादन कर रहे हैं.

हरी मिर्च ने बदल दी किस्मत, शिवपुरी के किसान 300 बीघा में उगा रहे, यहीं गांव की पहचान
Shivpuri Chilli Farming: 300 बीघा में उत्पादन कर रहे किसान.

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसानों ने मिर्ची का उत्पादन कर न केवल खुद को मालामाल किया है, बल्कि इलाके की एक नई पहचान भी बनाई है. मिर्च उत्पादन में रिकॉर्ड पैदावार करने वाले किसानों का कहना है कि परंपरागत खेती से हटकर अपनाया गया यह प्लान पूरी तरह सफल रहा है. जिससे उनका गांव उन्नत खेती के लिए पहचाना जाता है.

मिर्ची की पैदावार के लिए जाने जाने वाला यह गांव महेश्पुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर एक जंगल के पास है. पहले यह गांव लाल मिर्च उत्पादन के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था, लेकिन समय के साथ इसकी मांग घटती गई. लेकिन, अब हरी मिर्च के बंपर उत्पादन से यहां के किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है. खरीफ सीजन में किसान गांव के कुल रकबे के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में मिर्ची की खेती करते हैं.

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300 बीघा में मिर्च का उत्पादन 

सरपंच रामप्रकाश धाकड़ के अनुसार, जंगल होने के कारण यहां खेती का रकबा करीब 1 हजार बीघा है. सीमित जमीन होने के कारण अधिकांश किसान उन्नत खेती पर ध्यान देते हैं. पहले यहां की लाल मिर्च की मांग अशोकनगर, मुरैना समेत आसपास के जिलों में अधिक थी, लेकिन अब हरी मिर्च की मांग बढ़ने से किसान खरीफ सीजन में करीब 300 बीघा में इसका उत्पादन कर रहे हैं. इसी के साथ 300 बीघा में उन्नत तकनीक से टमाटर की खेती भी की जा रही है.

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पशुपालन को भी बढ़ावा दे रहे 

गर्मियों का दौर खत्म होने के बाद किसान फिर से मिर्ची और टमाटर उत्पादन की तैयारी में जुट जाते हैं. बोरवेल के जरिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. यहां के किसानों ने आसपास के जंगल को भी रोजगार का साधन बना लिया है. वे जंगल से जड़ी-बूटियां इकट्ठा करते हैं और गांव में पशुपालन को भी बढ़ावा दे रहे हैं. पहले यह सब सुनने में अजीब लगता था, लेकिन अब किसानों की स्थिति और प्रगति देखकर कहा जा सकता है कि इस इलाके के किसानों ने खेती को लाभ का धंधा बना दिया है.

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