धोखाधड़ी से आरक्षक की नौकरी पाने के मामले में प्रथम अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार मिश्रा, जिला सतना ने आरोपी टिंकू कुमार यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. कोर्ट ने आरोपी को दो वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है. इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम, 1937 के अंतर्गत एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई.
प्रकरण में सरकार की ओर से अभियोजन अधिकारी चंद्र प्रकाश मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की. अभियोजन प्रवक्ता संदीप कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बिहार के रहने वाले आरोपी टिंकू कुमार यादव (34) का चयन आरक्षक संवर्ग भर्ती परीक्षा वर्ष 2013 में हुआ था. प्रशिक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभ्यर्थी ने हिंदी विषय का अध्ययन नहीं किया था, जिससे उसके चयन पर संदेह उत्पन्न हुआ.
अंगूठा के निशान आरोपी के नहीं निकले
कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच कराई. जांच के दौरान आरोपी की ओएमआर उत्तर शीट, उपस्थिति पत्रक, प्रश्न पत्र का मुख्य पृष्ठ और उत्तर पुस्तिका जब्त की गई. साथ ही आरोपी के दाएं और बाएं हाथ के अंगूठों के निशान लिए गए. विवादित अंगूठा चिह्नों की वैज्ञानिक जांच कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि ओएमआर शीट पर अंकित अंगूठा चिह्न आरोपी के नहीं थे.
इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर माधवनगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई. बाद में घटनास्थल कोलगवां थाना क्षेत्र में पाए जाने के कारण मामला कोलगवां में दर्ज हुआ. विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन दर्ज कर आवश्यक जब्ती कार्रवाई पूर्ण कर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए उपरोक्त दंडादेश पारित किया.