
Corruption in Madya Pradesh News: शिवपुरी के पीडब्ल्यूडी विभाग में 7 करोड़ रुपये का वेतन घोटाला उजागर हुआ है. ट्रेजरी ऑफिसर और ट्रेजरी अकाउंटेंट ने 15 लोगों पर शहर के थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज कराई है. इस पर पुलिस ने संज्ञान लेकर सरकारी राशि का गबन करने का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में शिवपुरी जिले के वर्तमान पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री समेत 4 पूर्व कार्यपालन यंत्रियों को आरोपी बनाया गया है.
7 करोड़ रुपये का यह वेतन घोटाला 2018 से 2023 के बीच में अंजाम दिया गया था. अब इसकी एक-एक कर परतें खुलती जा रही है. बताया गया है कि आरोपियों ने पासवर्ड लीक कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया था, जिसका सनसनी खींच खुलासा आयुक्त कोष और लेखाकोष भोपाल ने हाल ही में किया है.
कौन-कौन आया कार्रवाई की जद में
पुलिस में शिकायत के बाद इस पूरे घोटाले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें वर्तमान में पदस्थ पीडब्ल्यूडी विभाग के मुख्य कार्यपालन यंत्री धर्मेंद्र यादव, इसके साथ पूर्व में कार्यपालन यंत्री के पद पर पदस्थ रहे चार कार्यपालन यंत्री जिनमें ओम हरि शर्मा. जीबी मिश्रा. बीएस गुर्जर और हरिओम अग्रवाल आरोपी बनाए गए हैं. गौरतलब है कि वर्तमान में पदस्थ धर्मेंद्र यादव को छोड़कर सभी मुख्य कार्यपालन यंत्री सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
संभागीय लेखा अधिकारी को भी बनाया आरोपी
इस मामले में संभागीय लेखा अधिकारी सहित 15 लोगों पर गाज गिरी है. पुलिस ने इस मामले में संभागीय लेखा अधिकारी HK मीना, संजय शर्मा, वैभव गुप्ता और विभाग के बाबू दयाराम शिवहरे और प्रेमनारायण नामदेव के साथ आउटसोर्स कर्मचारी गौरव श्रीवास्तव, सौरभ श्रीवास्तव, शाहरुख खान और नसीम खान पर भी केस दर्ज किए हैं. वहीं, 7 करोड़ रुपये के इस वेतन घोटाले में धूलजी एवं सरिता देवी समाज सुधार समिति भी आरोपियों में शामिल हैं, जिन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है.
यह भी पढ़ें- Wheat MSP: यहां गेहूं किसानों को MSP के साथ मिल रहा है बोनस का तोहफा, अन्नदाताओं के खिले चेहरे
2018 से 2023 के बीच हुआ था यह गड़बड़ झाला
2018 से 2023 के बीच इस वेतन घोटाले को अंजाम दिया गया था. बताया जाता है कि इस मामले की जांच कर रहे डिप्टी कलेक्टर अनुपम शर्मा ने जब एक-एक परत खोली तो मामला सामने आया. जांच में यह बात सामने आई है कि इस घोटाले को लॉगिन आईडी पासवर्ड लीक करके अंजाम दिया गया था. विभागीय जांच में सामने आया है कि मुख्य कार्यपालन यंत्रियों ने अपने आईडी और पासवर्ड गैर जिम्मेदार लोगों को दिए और इस वजह से इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया जा सका. देखते ही देखते सरकारी राशि का इतना बड़ा गबन को अंजाम दिया गया. इस घोटाले को आयुक्त कोष और लेखा कोष भोपाल ने उजागर किया है.
यह भी पढ़ें- 15 घंटे अपने आवास पर छापे के बाद भूपेश बघेल ने किया बड़ा खुलासा, बोले- मेरे घर से ये-ये सामान ले गई CBI